The Art of Living Quotes
The Art of Living: A Guide to Contentment, Joy and Fulfillment
by
Dalai Lama XIV122 ratings, 3.95 average rating, 18 reviews
The Art of Living Quotes
Showing 1-30 of 71
“हमारे पास प्रचुर धन, भोजन और आवास हो सकते हैं; परंतु इन वस्तुओं को अत्यधिक महत्त्व देने के कारण हम उन्हें व्यर्थ बना देते हैं। इस प्रकार के अनुभव परिवर्तन के दुःख हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“वास्तविक दुःख और उनके वास्तविक कारण अवांछनीय बातों के कारण-कार्य हैं, उनकी वास्तविक समाप्ति और सही मार्ग वांछनीय बातों के कारण-कार्य हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“चार महान् सत्यों की शिक्षा दी—दुःख, दुःख का कारण, दुःख की समाप्ति और दुःख की समाप्ति का मार्ग।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“कल्पना करें कि ये थंगकाओं की मूर्तियाँ नहीं हैं बल्कि वे साक्षात् उपस्थित हैं और कल्पना करें कि बुद्ध एवं इन महान् धुरंधरों की उपस्थिति में आप उनकी शरण में हैं और दुःखी सचेतन प्राणियों के लाभ के लिए बोधिचित्ता उत्पन्न कर रहे हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“जब आप एक थंगका या बुद्ध की मूर्ति के सान्निध्य में हों तो सबसे पहले आपको यह कल्पना करनी चाहिए कि आप सचमुच बुद्ध शाक्य मुनि की उपस्थिति में खड़े हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“बोधिचित्ता उत्पन्न करने के लिए हम तीन कविताओं का पाठ करते हैं और उनके अर्थ पर विचार करते हैं। पहली कविता बुद्ध, धर्म और संघ की शरण में जाने से संबंधित है; दूसरी कविता बोधिचित्ता उत्पन्न करने के संबंध में है और तीसरी बोधिसत्त्व आचरण को सशक्त करने तथा बढ़ाने के संबंध में है। सामान्यतः”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“दूसरों के लिए उपयोगी बन पाने के लिए 'मैं' के गहरे बोध, एक सशक्त अहंभाव की आवश्यकता है। परंतु नकारात्मक अहंभाव अत्यधिक आत्मकेंद्रित 'मैं' है।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“मेरी एक प्रिय प्रार्थना है, 'जब तक अंतरिक्ष है, मैं भी रहूँगा।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“बुद्ध स्वभाव चित्त का रिक्त स्वभाव हो सकता है; ऐसा होने पर यह एक चेतना नहीं है। वह एक आदि, निर्मल, ज्योतिर्मय चित्त भी हो सकता है,”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“यह समझ कि सभी घटनाएँ अस्मिता-रहित और रिक्त होती हैं, हमें उसी निष्कर्ष तक ले जाती हैं। जब हम कहते हैं कि निर्वाण शांति है या मुक्ति, पूर्ण शांति की मनोदशा है, हमें बोध है कि प्रत्येक मनुष्य बुद्ध स्वभाव का है”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“बुद्ध ने, जिन्हें 'चार बौद्ध प्रवर्तन' या 'चार बौद्ध मुहरें' कहा जाता है, उनकी शिक्षा दी—सभी सकारण घटनाएँ अस्थायी होती हैं; सभी प्रदूषित सत्ताएँ दुःखदायी हैं; सभी घटनाएँ अस्मिता-रहित एवं रिक्त होती हैं और निर्वाण या मुक्ति शांति है। इन बौद्ध प्रवर्तनों को समझकर आप समचित्तता के विभिन्न चरणों तक पहुँच सकते हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“अस्मिताविहीनता की यह समझ विकसित करने से आप इस तथ्य को पहचान सकेंगे कि चूँकि कोई वस्तु नहीं है और न कोई आत्मनिष्ठ मन है, जिन्हें चिह्नित किया जा सके, इसलिए आसक्ति विकसित करने का कोई आधार ही नहीं है।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“अस्मिताविहीनता पर यह दृष्टिकोण चित्तमात्र मत द्वारा दिया गया है। इस मत के अनुसार बाह्य रूप में कोई वस्तु अस्तित्व में नहीं है। हर वस्तु चित्त की रचना है; हर वस्तु चित्त में है। आप किसी वस्तु का अनुभव नहीं कर सकते, यदि वह चित्त से तत्त्वतः पृथक् है। एक”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“घृणा और क्रोध प्रायः आक्रामक रूप ले लेते हैं और हिंसा के रूप में प्रकट होते हैं। तथापि जब हम आसक्ति जैसी अन्य कष्टदायी भावनाओं पर विचार करते हैं तो वे मृदु प्रतीत होती हैं और मित्रवत् दिखाई देती हैं। परंतु ये भी बहुत विनाशकारी हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“सामनेवाला व्यक्ति जो कुछ भी अभिव्यक्त कर रहा है, वह उसके कर्मों का फल है। हम उस व्यक्ति को दोष देने के स्थान पर उसके बुरे कर्मों को दोषी मानते हैं। इस प्रकार, समचित्तता का विकास करने में हम समर्थ हो जाते हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“समचित्तता का अर्थ किसी एक वस्तु से अत्यधिक आसक्ति न होने और साथ ही किसी और वस्तु के लिए घृणा का भाव भी न होने से है।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“यदि हम उसी व्यक्ति (शत्रु) को एक विस्तृत दृष्टिकोण से देखें और यह अनुभव करें कि वह मानव समाज का ही एक भाग है, ईश्वर की रचना का एक भाग है तो हमारी नकारात्मक भावनाएँ क्षीण हो जाएँगी। समचित्तता के विकास में यह दृष्टि सहायक हो सकती है।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“घटनाएँ परस्पर संबद्ध, परस्पर निर्भर और परस्पर संबंधित होती है। जब हम इस सच्चाई को देखने में असमर्थ होते हैं तब समस्याएँ खड़ी होती हैं, क्योंकि हमारी प्रवृत्ति केवल एक घटक को चुनने की होती है—चाहे वे प्रसन्नता के अनुभव हों या समस्याओं और कठिनाइयों के और फिर एक जटिल परिस्थिति की व्याख्या के लिए हम उस एक घटक का उपयोग करते हैं। हम कई घटकों में से केवल एक को केंद्रित करते हैं और उस विशिष्ट कारण या घटक पर ही संकेंद्रण करते हैं। इसी कारण अपने सामने खड़ी समस्याओं का समाधान करने में हम असमर्थ रहते हैं। वास्तव में, कठिनाइयों को सुलझाने के बजाय कभी-कभी हम उनकी संख्या में वृद्धि कर देते हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“घृणा और आसक्ति अशांत कर देती हैं। ऐसी भावनाओं को क्षीण या कम करने के लिए एक ओषधि है समचित्तता की साधना।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“नालंदा के धुरंधर—तिलोपा और नरोपा जैसे सिद्ध तथा मिलरेपा और सोंगखापा जैसे तिब्बती धुरंधरों ने अपनी भावनाओं के रूपांतरण के लिए असंख्य कठिनाइयाँ सहन करते हुए सुदूर स्थानों में वर्षों बिताए।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“हम अपनी मानवीय बुद्धि के अधिकतम उपयोग और संवेदना के माध्यम से प्रतिबद्धता विकसित कर सकते हैं। प्रतिबद्धता से उत्साह उपजता है और उत्साह से कड़ा परिश्रम उत्पन्न होता है। हम सत्कर्मों के आदी बन जाते हैं और हमारे भावनात्मक जगत् पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ता है। वही बुद्धिवादी मार्ग है।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“महान् आत्माओं का संदेश मूल रूप में वही है—प्रेम, संवेदना, क्षमा, सहनशीलता, अनुशासन और संतोष।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“मंशजुश्री के मंत्र 'ओम आह रा पा द्सा ना धि' का पाठ करने के लिए भी कहता। यदि आप इसका पाठ करें तो यह आपकी बुद्धि को बढ़ाएगा।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“कई नकारात्मक भावनाएँ दृश्यों के आधार पर विकसित होती हैं, इसलिए सत्य की उपलब्धि नकारात्मक भावनाओं को कम कर देती है। इसीलिए शून्य की अवधारणा दैनिक अनुभवों के लिए बहुत प्रासंगिक है।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“छह पूर्णताओं को पद्धति और बुद्धिमत्ता में इस प्रकार वर्गीकृत करते हैं—एकाग्रता और बुद्धिमत्ता के अभ्यास को हम बुद्धि संचयन वर्ग में रखते हैं और दान व नैतिकता के पालन के अभ्यास तथा धैर्यपूर्ण आचरण का एक भाग हम 'प्रतिभा संचयन' वर्ग में रखते हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“बुद्धिमत्ता प्रमुख रूप से दो प्रकार की होती है—एक है 'परंपरागत तथ्यों का अन्वेषण करनेवाली बुद्धिमत्ता' और दूसरी 'परम सत्ता, परम सत्य को उपलब्ध करानेवाली बुद्धिमत्ता'। शांत, स्थिर चिंतन, मनन या विशिष्ट अंतर्दृष्टि की पहचान इस बात से नहीं होती कि लक्ष्य एक परंपरागत सत्य है। यह एक परम सत्य बल्कि लक्ष्य के प्रति चित्त की एकाग्रता से होती है। तो”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“धैर्यपूर्ण आचरण का संबंध है, यह तीन प्रकार का होता है—पहला है 'कठिनाइयों और दुःखों को झेल पाने का धैर्य'; दूसरा है 'दुःखों और कठिनाइयों को स्वेच्छा से झेलने का धैर्य' और तीसरा है 'धार्मिक अभ्यासों में निश्चयात्मकता विकसित करने का धैर्य', जो रिक्तता पर चिंतन-मनन से संबंधित है।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“बोधिसत्त्व के आचरण के संदर्भ में, तीन प्रकार की नैतिकता होती है। पहली 'नकारात्मक कार्यों को न करने की नैतिकता' कहलाती है; दूसरी है 'सद्गुण संचयी नैतिकता' और तीसरी कहलाती है 'सचेतन प्राणियों के प्रयोजन पूर्ण करने की नैतिकता'।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“दान और उदारता के आचरण के, उनकी गुणवत्ता के अनुसार, तीन स्तर हैं। पहला स्तर 'भौतिक सुविधाएँ देना' कहलाता है, दूसरा है 'निर्भयता देना'—अर्थात् दुःखों और भय से दूसरों की रक्षा करना और तीसरा स्तर 'धर्म शिक्षा देना' कहलाता है।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
“इसका यह अर्थ सचमुच नहीं है कि आप लोगों की समस्याओं और निर्धनता का समाधान करने में सक्षम हैं। दान और उदारता का आचरण दूसरों को कुछ देने की उस व्यक्ति की इच्छा पूर्ण करने के लिए है। इस तरह से दूसरों की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित करने का साहस और संकल्प विकसित करते हैं।”
― Jeevan Jeene Ki Kala
― Jeevan Jeene Ki Kala
