विराज बहू Quotes

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विराज बहू विराज बहू by Sarat Chandra Chattopadhyay
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विराज बहू Quotes Showing 1-7 of 7
“केंचुल से तो खेला जा सकता है, लेकिन जमींदार के लड़के के लिए भी जीवित विषधर खेलने की चीज नहीं”
Sarat Chandra Chattopadhyay, बिराज बहू
“उसकी आंखों के आगे ऐसा अन्धकार छा गया जैसे तेज बिजली के चमक जाने से आंखें चौंधिया गई हों”
Sarat Chandra Chattopadhyay, बिराज बहू
“पाप छिपाने से और बढ़ता है।”
Sarat Chandra Chattopadhyay, बिराज बहू
“नशेबाज सब कुछ सहन कर सकता है, लेकिन अपनी बुद्धि भ्रष्ट हो जाने की बात सहन नहीं कर सकता”
Sarat Chandra Chattopadhyay, बिराज बहू
“भाटे के खिंचाव में पानी जैसे पल-पल अपने क्षय के चिह्नों को तट प्रदेश में अंकित करके धीरे- धीरे दूर होता चला जाता है”
Sarat Chandra Chattopadhyay, बिराज बहू
“शान्त, मौन पृथ्वी के अन्तःस्थल में कैसी आग धधकती है”
Sarat Chandra Chattopadhyay, बिराज बहू
“बर्छे से बेधकर मारा जाने वाला नाग बार-बार बर्छे को ही डसता है और थक कर उसी की ओर देखता रह जाता है”
Sarat Chandra Chattopadhyay, बिराज बहू