गुनहग़ार Quotes

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गुनहग़ार (book/novel Authored by Amaan shaikh) गुनहग़ार by Amaan Shaikh
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गुनहग़ार Quotes Showing 1-2 of 2
“अंतिम प्रस्थान
खुद की चिता को अब स्वयं आग करते हैं,
चलो इस अंतहीन पीड़ा का अब बहिष्कार करते हैं।
मीरा के उस प्रेम का अब राग करते हैं,
वैराग्य की राह का अब बस जाप करते हैं।
चलो इस बार भी हम सबको माफ़ करते हैं,
विरह के आलाप से खुद को ही साफ़ करते हैं।
चलो अब प्रेम का ही प्रकाश करते हैं,
प्रेम त्याग कर अब खुद का ही त्याग करते हैं।
अपनी अंतहीन पीड़ा का संहार करते हैं,
बैसाखी से अब सागर पार करते हैं।
चिता की अग्नि से अब आखिरी श्रृंगार करते हैं,
चलो हम भी अब खुद को माफ़ करते हैं।”
Amaan Shaikh , गुनहग़ार (Gunahgar): by Amaan Shaikh
“औलाद"
अच्छी औलाद बनने के लिए, खुद को दफ़नाना होता है,
ज़िंदा होकर भी बस एक 'ज़िंदा लाश' बन जाना होता है।
अपनी चिता को खुद, अपने ही हाथों से आग लगाना होता है।
छोड़कर अपने सभी सपने, उनके सपनों की खातिर मर जाना होता है,

सवाल करने पे हर बार, हमें ही नकार दिया जाता है।
जीते-जी हमारे ही ख्वाबों को, बेरहमी से मार दिया जाता है

अरमानों का उनके बोझ लिए, हम बस चल रहे होते हैं,
हर वक्त घुट-घुट के कोने में, हम बस रोते हैं।

दुख हमारी अपनी ही एक खोज है,
जिसने हमारे वजूद पर ग्रहण लगा दिया।
हम ढूंढने निकले थे रौशनी की किरण,
मगर अंधेरों ने हमें ही अपना पता बना लिया।”
Amaan Shaikh, गुनहग़ार