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Tat Ki Khoj Quotes

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Tat Ki Khoj Tat Ki Khoj by Harishankar Parsai
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“दुख आदमियों को मिलाता है, पर दुख अलग भी करता है । दो दुखी आदमी आपस में इसलिए नहीं बोलते कि कहीं हमारे हाथों दुख के बंद डब्बे का ढक्कन नखुल जाय । वे इसलिए नहीं बोलते कि हर एक के सिर पर दुख का दुगना बोझ हो जायगा ।”
― Harishankar Parsai, Tat Ki Khoj
“आदमी सहानुभूति चाहता है दया नहीं। सहानुभूति में दूसरे की सामर्थ्य की अस्वीकृति नहीं होती पर दया व्यक्ति की सामर्थ्यहीनता, विवशता और पराजय को मान कर ही होती है। इससे व्यक्ति के अभिमान को बड़ी चोट लगती है, उसका निजत्व टूटता है। अत्याचार बर्दाश्त करने में एक गर्व है, पर दया बर्दाश्त करना बड़ी निर्लज्जता है”
― Harishankar Parsai, Tat Ki Khoj