Magadh Quotes

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Magadh: Poems Magadh: Poems by Shrikant Verma
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Magadh Quotes Showing 1-3 of 3
“सीढियां समाप्त नहीं
होतीं
उन्नति की हो
अथवा
अवनति की”
Shrikant Verma, Magadh
“जिसका रोहिताश्व
मारा गया हो,
क्या तुम उसे
विश्वास दिला सकते हो
कि तुम
रोहिताश्व नहीं हो?”
Shrikant Verma, Magadh
“कोई छींकता तक नहीं
इस डर से
कि मगध की शांति

भंग न हो जाए,
मगध को बनाए रखना है, तो,
मगध में शांति
रहनी ही चाहिए

मगध है, तो शांति है

कोई चीख़ता तक नहीं
इस डर से
कि मगध की व्‍यवस्‍था में
दख़ल न पड़ जाए
मगध में व्‍यवस्‍था रहनी ही चाहिए

मगध में न रही
तो कहाँ रहेगी?
क्‍या कहेंगे लोग?


लोगों का क्‍या?
लोग तो यह भी कहते हैं
मगध अब कहने को मगध है,

रहने को नहीं

कोई टोकता तक नहीं
इस डर से
कि मगध में
टोकने का रिवाज न बन जाए

एक बार शुरू होने पर
कहीं नहीं रूकता हस्‍तक्षेप-

वैसे तो मगध निवासिओं
कितना भी कतराओ
तुम बच नहीं सकते हस्‍तक्षेप से-

जब कोई नहीं करता
तब नगर के बीच से गुज़रता हुआ
मुर्दा
यह प्रश्‍न कर हस्‍तक्षेप करता है-
मनुष्‍य क्‍यों मरता है?”
Shrikant Verma, Magadh