रतिविलाप Quotes
रतिविलाप
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रतिविलाप Quotes
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“नारी सौन्दर्य के आदर्श की ऐसी सफल अभिव्यक्ति और मिल ही कहाँ सकती थी? मूर्ति के पूर्ण विकसित उरोज, विस्तृत नितम्ब, प्रणयोन्मत्त मदमाती उनींदी आँखें और लास्यपूर्ण चेष्टाएँ।”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“जैसे सूर्य की प्रथम किरण ने खिड़की के काँच का स्पर्श किया, नवजात शिशु के क्रन्दन से कमरा गूँज उठा। कैसा अद्भुत पीड़ा-मुक्ति का था वह क्षण! क्षण-भर पूर्व की पीड़ा का कैसा आनन्ददायक अन्त था वह।”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“किसी शतावरी क्षीण लता की भाँति उसकी जड़ें धरा से लाख खींची जाने पर भी, सहज ही में वह विच्छिन्न नहीं कर पाएगी,”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“कुटिल संसार के विषम गली-कूचों से प्रत्येक लड़की को गुजरना होता है, बिदू! किन-किन खन्दक-खाइयों से उसे बचना होगा, क्या कभी उसे बताने का भी समय रहा था दामिनी के पास? क्षुब्ध ग्लानि से अवसन्न अवगुंठिता दामिनी खड़ी ही रह गई थी।”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“एक बार भी नहीं सोचा कि उस विवेकहीन प्रणय-यात्रा का अन्त क्या होगा? दिन डूबे वह घर लौटी और भूल-भरे कपड़ों में ही, पलंग”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“जब माँ का व्यक्तित्व अत्यन्त प्रभावशाली बन उठता है, तब संतान कितनी ही शक्तिशाली क्यों न हो कुछ-न-कुछ अंश में अन्तर्मुखी बन ही जाती है। वैदेही”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“भाषा, कोई भी क्यों न हो, उसमें प्रशंसा या निन्दा की स्वरलिपि उस भाषा से अनभिज्ञ लोग भी समझ लेते”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“स्वयं मनुष्य के अतीत का दौर्बल्य ही उसे अपनी सन्तान के प्रति ऐसा शंकालु बना देता है।”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“भाषा, कोई भी क्यों न हो, उसमें प्रशंसा या निन्दा की स्वरलिपि उस भाषा से अनभिज्ञ लोग भी समझ लेते हैं।”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“आज भी दीवारों पर रैब्राँ, वॉन गॉग, पिकासो और सेजाँ के चित्र टँगे थे और बीच में लगा था—रवि वर्मा द्वारा अंकित”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“पन्त-पांडे-जोशियों का मुहल्ला है। यहाँ झिजाड़ के दीवान और कसून के पांडे के घरों में शंख-घट बजते हैं,”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
“टीप, काले मखमल की पट्टी में गुँथा गुलुबन्द, लड़ीवाले झूमके, सतलड़, पचलड़, चूहादंती पहुँची, झाँवर, लच्छे, अनोखे और छागल,”
― रतिविलाप
― रतिविलाप
