पथ के साथी Quotes
पथ के साथी
by
Mahadevi Verma87 ratings, 4.31 average rating, 7 reviews
पथ के साथी Quotes
Showing 1-30 of 58
“मनुष्यता की विजय-यात्रा के लिए ऐसे ही पथिकों की आवश्यकता होती है जिनका ध्यान पथ के काँटों और पैर की चोटों की ओर न जाकर गन्तव्य में केन्द्रित रहे”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“कविता सबसे बड़ा परिग्रह है क्योंकि यह विश्व मात्र के प्रति स्नेह की स्वीकृति है । वह जीवन के अनेक कष्टों को उपेक्षा योग्य बना देती है, क्योंकि उसका सृजन स्वयं महती वेदना है। वह शुष्क सत्य को आनन्द में स्पन्दित कर देती है,”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“लहर जब तट से टकराती है तब वहीं बिखर कर और समाप्त होकर अपनी यात्रा का अन्त कर लेती है। पर वही लहर जब दूसरी लहर से टकरा जाती है तब दोनों प्रवाह की परम्परा में एक होकर अनन्त लक्ष्य पा लेती है। मानवीय सम्बन्धों में भी यही सत्य हैं । जब एक का मनोराग दूसरे की पार्थिवता मात्र से टकराकर बिखर जाता है तब शरीर के बाहर उसकी गति नहीं है। पर जब एक की चेतना दूसरे की चेतना के साथ प्रगाढ़ सम्पर्क में आती है, तब उसकी यात्रा अनन्त है।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“जब आकाश अपनी बादलों की गीली जटाएँ निचोड़ता रहता है और धरती वर्षा-मंगल के पर्व-स्नान में भीगती रहती है ।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“लचीले बेत के समान झुक कर उन्होंने तूफान को अपने ऊपर से बह जाने दिया”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“चिर सृजनशील कलाकार चिरकुमार देवर्षि नारद की कोटि के होते हैं, जिनकी गृहस्थी बसने के क्षण में स्वयं भगवान तक बाधक बन बैठे”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“परिग्रह की दृष्टि से वे चिरकुमार सभा के आजीवन अध्यक्ष हो सकते हैं।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“उन्हें कोई नया क्षितिज मिल गया”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“संन्यास का अर्थ समझने के लिए जाकर मैंने उन्हें जिस उत्साह भरी स्थिति में पाया उसने मेरे प्रश्न को उत्तर बना दिया । टीले पर बनी अपनी उस कुटी का नक्षत्र नाम रखकर वे किसी नवीन सृजन की दिशा का अनुसन्धान करने में लगे हुए थे ।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“आँसू के खारे पानी में डुबाये बिना सौन्दर्य के चित्र-रंग पक्के नहीं हो सकते, पर प्रकृति के पास सौन्दर्य है, आँसू नहीं।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“स्नेह सब कुछ सह सकता है, केवल दया का भार नहीं सह सकता”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“आघात या आघात का अभाव दोनों एक मौन या एक स्वर बन गए हैं, तब फिर संगीत का सृजन और लय सम्भव नहीं।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“सितार यदि समरसता पा ले तो फिर झंकार के जन्म का प्रश्न ही नहीं उठता,”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“बहती हुई नदी का जल आदि से अन्त तक ऊपर से कहीं तरंगाकुल, कहीं प्रशान्त मन्थर, जल ही दिखाई देता है, परन्तु वह तरलता किसी शून्य पर प्रवाहित नहीं होती । वस्तुत: उसके अतल अछोर जल के नीचे भी भूमि की स्थिति अखंड रहती है । इसी से आकाश के शून्य से उतरने वाले मेघ-जल को हम बीच में तटों से नहीं बाँध पाते, पर नदी के तट उसकी गति का स्वाभाविक परिणाम हैं । भाव के सम्बन्ध में भी यही सत्य है । जिसके तल में कोई संश्लिष्ट जीवन-दर्शन नहीं है, उसे आकाश का जल ही कहा जा सकता है । जीवन को तट देने के लिए, उसके आदि की इकाई को अन्त की समष्टि में असीमता देने के लिए ऐसे दर्शन की आवश्यकता रहती है जिस पर श्रेय प्रेय में तरंगायित होकर सुन्दर बन सके।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“आकाश को नीले कपड़े की चीरों में विभाजित कर देने वाली काशी की गलियों में प्रवेश कर मुझे सदा ऐसा लगता है मानो मैं किसी विशालकाय अजगर के उदर में घूम रही हूंँ,”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“यदि स्पर्श करने वाले में मानवता के लौह परमाणु हैं तो किसी ओर से भी स्पर्श करने पर वह स्वर्ण बन जाएगा। पारस की अमूल्यता दूसरों का मूल्य बढ़ाने में है । उसके मूल्य में न कोई कुछ जोड़ सकता है न घटा सकता है।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“जो अपने पथ की सभी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष बाधाओं को चुनौती देता हुआ, सभी आघातों को हृदय पर झेलता हुआ लक्ष्य तक पहुँचता है उसी को युग-स्रष्टा साहित्यकार कह सकते हैं । निराला जी ऐसे ही विद्रोही साहित्यकार हैं।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“उसका सत्य इनकी भ्रान्तियों से मेल नहीं खाता ।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“मनुष्य जाति की नासमझी का इतिहास क्रूर और लम्बा है । प्रायः सभी युगों में मनुष्य ने अपने में श्रेष्ठतम, पर समझ में न आने वाले व्यक्ति को छाँटकर, कभी उसे विष देकर, कभी सूली पर चढ़ाकर और कभी गोली का लक्ष्य बनाकर अपनी बर्बर-मूर्खता के इतिहास में नये पृष्ठ जोड़े हैं”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“घृणा का भाव मनुष्य की असमर्थता का प्रमाण है।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“निराला किसी से भयभीत नहीं, अतः किसी के प्रति क्रूर होना उनके लिए सम्भव नहीं।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“सत्य का मार्ग सरल है। तर्क और सन्देह की चक्करदार राह से उस तक पहुँचा नहीं जा सकता। इसी से जीवन के सत्य-द्रष्टाओं को हम बालकों जैसा सरल विश्वासी पाते हैं । निराला जी भी इसी परिवार के सदस्य हैं ।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“जो कलाकार हृदय के गूढ़तम भावों के विश्लेषण में समर्थ है उसमें ऐसी सरलता लौकिक दृष्टि से चाहे विस्मय की वस्तु हो, पर कला-सृष्टि के लिए यह स्वाभाविक साधन है”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“अविराम संघर्ष और निरन्तर विरोध का सामना करने से उनमें जो एक आत्मनिष्ठा उत्पन्न हो गई है उसी का परिचय हम उनकी दृप्त-दृष्टि में पाते हैं।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“त्याग हमारी पूर्णता का परिणाम है ।”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“अब हम संन्यास लेंगे।’ मेरी उमड़ती हँसी को व्यथा के बाँध ने जहाँ-का-तहाँ ठहरा दिया । इस निर्मम युग ने इस महान कलाकार के पास ऐसा क्या छोड़ा है जिसे स्वयं छोड़कर यह त्याग का आत्मतोष भी प्राप्त कर सके”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“अव्यक्त वेदना की तरंग के स्पर्श से मानो पाषाण में परिवर्तित होने लगे। उनकी झुकी पलकों से घुटनों पर चूने वाली आँसू की बूँदें बीच-बीच में ऐसे चमक जाती थीं मानो प्रतिमा से झड़े जूही के फूल हों”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“भाव की अतल गहराई और अबाध वेग”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“दिन-रात के पगों से वर्षों की सीमा पार करने वाले अतीत”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
“मुझे तो उस लहर की-सी मृत्यु चाहिए जो तट पर दूर तक आकर चुपचाप समुद्र में लौट कर समुद्र बन जाती है”
― पथ के साथी
― पथ के साथी
