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अप्सरा Quotes

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अप्सरा अप्सरा by सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
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अप्सरा Quotes Showing 1-30 of 64
“मुक्त जीवन-प्रसंग का प्रांगण छोड़ प्रेम की सीमित, पर दृढ़ बाँहों में सुरक्षित, बँध रहना उसने पसन्द किया।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“अविचल स्त्रीत्व, पतिनिष्ठा।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“आनन्द के समय जितना ही चुप रहा जाए, आनन्द उतना ही स्थायी होता है, और तभी उसकी अनुभूति का सच्चा सुख भी प्राप्त होता है।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“मुख पर शंका, सन्देह, नफरत आदि भाव बादलों-से, पहाड़ी दृश्य की तरह, बदल रहे थे।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“युवती की इतनी पवित्र चितवन”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“क्या किसी जात का आदमी तरक्की करके दूसरी जात में नहीं जा सकता?”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“मनुष्य के अज्ञान की मार मनुष्य ही तो सहते हैं।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“कमल-कलिका-सी संकुचित”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“आसक्ति के उद्‌दाम प्रवाह”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“उनके अपार ऐश्वर्य पर तृष्णा की विजय थी।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“असहाय आँखें प्रार्थना की अनिमेष दृष्टि”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“तृष्णार्त को ईप्सित सुस्वादु जल नहीं मिल रहा था—सामने महासागर था, पर हाय, वह लवणाक्त था!”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“अपने सुख की कल्पना कर दूसरों की निगाहों में अपने को बहुत छोटा देखने लगता था,”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“तमाम विरोधी गुण उस ध्वनि के तत्त्व में डूब गए।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“आपृष्ठ कमर”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“लोग पहले किसी सुन्दर वस्तु को उत्सुक आँखों से देखते हैं, पर जब किसी दूसरे स्वार्थ की याद आती है, आँखें फेरकर चल देते हैं।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“वास्तव-शक्ति उस छायाशक्ति से परास्त हो जाती है।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“अब वह केवल प्रवाह की अनुगामिनी”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“संसार आँखों के सामने रेगिस्तान-सा तप रहा था।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“विषाद तथा निद्रा के भार से छलछलाई हुई लाल हो रही”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“भगवान विश्वनाथ को भूमिष्ठ हो प्रणाम किया।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“मुकुलित आँखों से”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“पलकों के पत्र आँसुओं के शिशिर से भारी हो रहे”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“तस्वीर की तरह खड़ी आँसुओं के धुन्ध से, एकटक देखती”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“निःशब्द कपोलों से बहते हुए कई बूँद आँसू”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“मूर्तिवत्, निर्वाक्, अनिमेष नेत्रों से”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“प्रगति प्रतिहत नहीं।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“संसार के सहस्रों प्राणों के पावन संगीत तुम्हारी कल्पना से निकलने चाहिए।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“कल्पना के प्रासाद-शिखर पर एक दिन एकाकी देवी के रूप में तुमने पूजा की,”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara
“साहित्यिक! तुम कहाँ हो? तुम्हें केवल रस-प्रदान करने का अधिकार है, रस-ग्रहण करने का नहीं।”
― Suryakant Tripathi 'Nirala', Apsara

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