कृष्णकली Quotes

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कृष्णकली कृष्णकली by Shivani
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“एकाग्र: प्रयतो भूत्वा, इमं मंत्रमुदीरयेत्
ओम नमो भगवते वासुदेवाय।
अवशेनापि यन्नाम्नि कीर्तिते सर्वपातकै:।
पुमान् विमुच्यते सद्य: सिंहत्रस्तैर्मृगैरिव॥ विवशता से फैली हथेली में मुँदा जल झरझराकर फिर संगम के नीलाभ जल में एकाकार हो गया।”
Shivani, कृष्णकली
“तन्वंगी गजगामिनी चपलदृक् संगीतशिल्पान्विता”
Shivani, कृष्णकली
“भृङ्गश्यामल-कुन्तला च जलजग्रीवोऽ प...”
Shivani, कृष्णकली
“तन्वंगी गजगामिनी चपलदृक् संगीतशिल्पान्विता
नो ह्रस्वा न बृहत्तराऽथ सुकृशा मध्ये मयूरस्वरा,
पीनश्रोणि पयोधरा सुललिते जंघे वहन्ती कृशे।”
Shivani, कृष्णकली
“सेवाव्रत से बढ़कर तुम्हारे कठिन असाध्य मानसिक रोग की और कोई औषधि नहीं हो सकती।”
Shivani, कृष्णकली