Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए Quotes
Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
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Eeshaan Mahesh21 ratings, 4.62 average rating, 0 reviews
Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए Quotes
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“केवल शुद्ध प्रेमी चित में विश्वाम करता हूँ। आज बहुत युगों पश्चात् मुझे ऐसी चित्त भूमि मिली”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
“क्योंकि बीज में प्राण हैं और पत्थर निष्प्राण है। एक नीरस शिला से कहीं अधिक मूल्यवान् वह घास का पुष्प है,”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
“अर्जुन के मन में सुभद्रा के प्रति आकर्षण को देखकर वे उसका वरण करने में इसकी सहायता कभी न करते। इस सहयोग के फलस्वरूप उनको क्या नहीं सुनना पड़ा!”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
“श्रीकृष्ण को छोड़कर।" विदुर ने धीरे-से कहा। "हाँ!" धृतराष्ट्र को ऐसे लगा, जैसे उसके हर्षातिरेक में दौड़ते रथ के सम्मुख कोई खाई आ गई हो।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
“अपने मुख की उदासी को अपने पूरे शरीर पर ओढ़कर इधर-उधर टहलने लगा।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
“अर्जुन को केवल कृष्ण ही दिखाई दे रहे थे। सारा संसार उनके लिए विलुप्त हो चुका था।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
“संसार में प्रत्येक पदार्थ के होने का एक समय और उसकी उपयोगिता होती है। उसके बाद वह पदार्थ अपने मूल स्रोत में लौट जाता है। उसे लौटना ही होता है। यह लौटना उसकी नियति है। यह एक चक्र है। नारायणी सेना का गठन राक्षसी संस्कृति के पोषकों को नष्ट करने के लिए हुआ था। अब इस नारायणी सेना में अहंकार हो गया है। अब यह धर्म की स्थापना में कम और भोग-विलास एवं अनाचार की और अधिक उन्मुख होने लगी है। अब इसमें ठहराव आ गया है। ठहरे हुए जल में दोष हो जाता है, दाऊ! दूषित पदार्थ प्रकृति को स्वीकार्य नहीं है। वह उनका रूपांतरण कर उनको पुनः शुद्ध करती है। जिसे संसार मृत्यु कहता है, उसे मैं शुद्धीकरण की एक प्राकृतिक प्रक्रिया मानता हूँ। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत अब नारायणी सेना की आहुति दी जाएगी।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
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“पुत्र, तुम प्रत्येक समस्या के समाधान के रूप में शस्त्र-बल का ही आश्रय क्यों लेते हो? कभी राजनीति भी करा करो।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
“द्रौपदी के चीर-हरणवाली रात, दुःशासन ताप में जल रहा था और ज्वर की उस अचेतन अवस्था में कह रहा कि कृष्ण कोई ग्वाला नहीं, बल्कि सिद्ध तांत्रिक है। उसके बाद भी जब भी दुःशासन ने अधिक मदिरा का सेवन किया तो कृष्ण के संबंध में यही कहता रहा कि वह सिद्ध तांत्रिक है। उसके वश में सारे संसार की प्रेत-योनियाँ हैं। वह भूतेश्वर है।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
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“जितनी बातें करने में वह आपका एक दिन का समय लेगा;उतनी बात तो मैं पलक झपकते ही कर लूँगा। मन में समय की गति के नियम कुछ अलग ही होते है;”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
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“आहलादित वह इस बात से हूँ कि मेरी तथा मेरी मित्र-मंडली की बुद्धि कितनी अधिक चतुर है। उसकी राजनीतिक चातुर्य से परिपूर्ण बुद्धि ने इन पांडवों को बारह वर्षों तक वनों में खूब दौड़ाया और ये पागल अपने धर्म और वचन के कारण जी भरकर दौड़े। धर्म के नाम पर और वचन के नाम पर जीनेवाले इन पागल पांडवों को मैं कभी समझ नहीं पाया।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
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“तुम कृष्ण में ही खो जाना, फिर वह स्वयं तुम्हें सँभाल लेंगे।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
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“ललित कलाओं से सुसज्जित हृदय निर्दोष होता है। वह प्रकृति के गूढ़तम रहस्यों को अपने भावों में पिरोकर उन्हें प्रस्तुत करता है। तब ऐसा लगता है जैसे उसने उस पल को काल के हाथों से माँगकर थिर कर दिया हो।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
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“नहीं, संसार में कुछ भी अकारण नहीं है; किंतु संसार अकारण है।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
“जल पीने के बाद वह उस पात्र को किसी तिरस्कृत वस्तु के समान फेंक देता है। ऐसा व्यक्ति कभी इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकता कि उसके समकक्ष कोई पात्र सेवा का कार्य भी कर सकता है। तुम्हारा इस प्रकार से दीन-हीन और तिरस्कृत होकर रहना उस अहंकारी दुर्योधन की सोच से बहुत परे की बात थी। यही सेवा-कर्म तुम्हारा रक्षा-कवच बना।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
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“अस्तित्व उसके भीतर से होकर बह रहा है और उसकी लहरों पर तिर रहा है। तिरने की मुद्रा और तैरने की दशा दोनों का अंतर तो तुम समझते ही हो न!”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
“हम सब एक जैसे ही हैं पार्थ !अंतर केवल जागरण और सुषुप्ति का है। जो जाग गया, वह आनंदित है। उसके चिदाकाश में अहर्निश अनाहत नाद बह रहा है। प्रसन्न रहना उसका स्वभाव हो जाता है। परिस्थितियों को वह स्वीकार कर लेता है। यदि स्वीकार-भाव आ जाए तो फिर उद्विग्नता विदा हो जाती है।”
― Mujhe Krishna Chahiye | मुझे कृष्ण चाहिए
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