कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ Quotes

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कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ by कृश्न चन्दर
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“कभी-कभी मैं सोचता हूँ : एक स्त्री और एक टाइप-राइटर में क्या अन्तर है, जरा गुदगुदाओ , मुस्कुराहट बाहर।

- मंत्रियों का क्लब”
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“ऊँची एड़ी वाली सैंडल पहने हुए जब वह टप -टप करती हुई चलती थी तो ऐसा मालूम होता था जैसे दफ़्तर के फर्श पर टाइप कर रही है।
-मंत्रियों का क्लब”
कृश्न चन्दर, कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ
“बी. ए. की डिग्री तो एक बेकार, कागज का टुकड़ा है। वे दिन लद गए, जब बाप आलू-छोले बेचता था और बेटा बी. ए. पास करके, झट डिप्टी बन जाता था। अब तो स्थिति यह है कि यदि बाप डिप्टी है तो बेटा आलू-छोले बेच रहा है।
- बैचलर आफ आर्ट्स”
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“...मगर 'हैसियत' शब्द कितना सरल और खुला हुआ है जैसे किसी ने सर पर सात जूते मार दिए हों और 'एफोर्ड' में कितनी गुंजाइश है। वैसे अपनी भाषा में कभी-कभी विदेशी और अजनबी शब्द भी प्रयोग कर लेने से कितनी बचत हो जाती है।

-शहज़ादा”
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