सामर्थ्य और सीमा Quotes
सामर्थ्य और सीमा
by
Bhagwaticharan Verma28 ratings, 4.14 average rating, 0 reviews
सामर्थ्य और सीमा Quotes
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“वैसे तुम चेतन हो, तुम प्रबुद्ध ज्ञानी हो, तुम समर्थ, तुम कर्ता, अतिशय अभिमानी हो, लेकिन अचरज इतना तुम कितने भोले हो, ऊपर से ठोस दिखो, अन्दर से पोले हो, बनकर मिट जाने की एक तुम कहानी हो!”
― सामर्थ्य और सीमा
― सामर्थ्य और सीमा
