सामर्थ्य और सीमा Quotes

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सामर्थ्य और सीमा सामर्थ्य और सीमा by Bhagwaticharan Verma
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“वैसे तुम चेतन हो, तुम प्रबुद्ध ज्ञानी हो, तुम समर्थ, तुम कर्ता, अतिशय अभिमानी हो, लेकिन अचरज इतना तुम कितने भोले हो, ऊपर से ठोस दिखो, अन्दर से पोले हो, बनकर मिट जाने की एक तुम कहानी हो!”
Bhagwaticharan Verma, सामर्थ्य और सीमा