Find & Share Quotes with Friends

सामर्थ्य और सीमा Quotes

Rate this book
Clear rating
सामर्थ्य और सीमा सामर्थ्य और सीमा by Bhagwaticharan Verma
29 ratings, 4.17 average rating, 1 review
सामर्थ्य और सीमा Quotes Showing 1-1 of 1
“वैसे तुम चेतन हो, तुम प्रबुद्ध ज्ञानी हो, तुम समर्थ, तुम कर्ता, अतिशय अभिमानी हो, लेकिन अचरज इतना तुम कितने भोले हो, ऊपर से ठोस दिखो, अन्दर से पोले हो, बनकर मिट जाने की एक तुम कहानी हो!”
― Bhagwaticharan Verma, सामर्थ्य और सीमा