एक सड़क सत्तावन गलियां Quotes

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एक सड़क सत्तावन गलियां एक सड़क सत्तावन गलियां by Kamleshwar
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“किसी कच्चे घर के आँगन में बैठकर गाता, कोई सुनता। इमली के सूखे फूल नहीं, काजल लगी आँखों से रसधार झरती! धूल के उड़ते हुए बवण्डर नहीं, गोबर लिपि ठंडी धरती होती...महावर रंगे पैर होते और लिखना से भरी ऐपन की दीवारें। हर तीज-त्यौहार होता, रास-रंग होता। जीने, मरने वाला कोई साथ होता।”
Kamleshwar, एक सड़क : सत्तावन गलियाँ