तरकश /ترکش / Tarkash Quotes
तरकश /ترکش / Tarkash
by
Javed Akhtar1,162 ratings, 4.24 average rating, 105 reviews
तरकश /ترکش / Tarkash Quotes
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“दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं र”
― Tarkash
― Tarkash
“आज इतने बरसों बाद जब अपनी ज़िंदगी को देखता हूँ तो लग़ता है कि पहाड़ों से झरने की तरह उतरती, चटानों से टकराती, पत्थरों में अपना रास्ता ढूँढती, उमड़ती, बलखाती, अनगिनत भँवर बनाती, तेज़ चलती और अपने ही किनारों को काटती हुई ये नदी अब मैदानों में आकर शांत और गहरी हो गई”
― Tarkash
― Tarkash
“न जलने पाते थे जिसके चूल्हे भी हर सवेरे सुना है कल रात से वो बस्ती भी जल रही है मैं”
― Tarkash
― Tarkash
“एक ये घर जिस घर में मेरा साज़ो-सामां रहता है एक वो घर जिसमें मेरी बूढ़ी नानी रहती थीं।”
― Tarkash
― Tarkash
“आज इतने बरसों बाद जब अपनी ज़िंदगी को देखता हूँ तो लग़ता है कि पहाड़ों से झरने की तरह उतरती, चटानों से टकराती, पत्थरों में अपना रास्ता ढूँढती, उमड़ती, बलखाती, अनगिनत भँवर बनाती, तेज़ चलती और अपने ही किनारों को काटती हुई ये नदी अब मैदानों में आकर शांत और गहरी हो गई है।”
― Tarkash
― Tarkash
“मैं अकसर सोचता हूँ कि मुझमें कौन से लाल टँके हैं औऱ जगदीश में ऐसी क्या ख़राबी थी। ये भी तो हो सकता था कि तीन दिन बाद जगदीश के किसी दोस्त ने उसे बांदरा बुला लिया होता और मैं पीछे उन गुफाओं में रह जाता। कभी-कभी सब इत्तिफ़ाक़ लगता है। हम लोग किस बात पर घमंड करते हैं)।”
― Tarkash
― Tarkash
“जब हम दोनों अलग हो रहे थे तो मैंने उसका कड़ा उससे लेकर पहन लिया था और वह आज तक मेरे हाथ में है और जब भी उसके बारे में सोचता हूँ ऐसा लगता है कि वो मेरे सामने है और कह रहा है— बहुत नाकामियों पर आप अपनी नाज़ करते हैं अभी देखी कहाँ हैं, आपने नाकामियाँ मेरी”
― Tarkash
― Tarkash
