Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan Quotes
Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
by
Rajeev Saxena51 ratings, 4.76 average rating, 2 reviews
Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan Quotes
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“प्रकाश के आते ही अँधेरा गायब हो जाता है। लेकिन क्या अँधेरे के आने से प्रकाश पर कोई फर्क पड़ता है? नहीं पड़ता।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“स्वरूप, स्व मतलब स्वयं और रूप माने दिखना। यानी स्वरूप का अर्थ है—हमारा वास्तविक रूप। हमारा वास्तविक रूप कुछ और नहीं, आनंद ही है। उसी को ‘सच्चिदानंद’ कहा जाता है। यानी सत्य, चित्त, आनंद।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“शून्य मन की अवस्था’ कहा जा सकता है। यानी हमारे मन की झील में जब किसी भी विचार की कोई लहर न उठे। झील पूरी तरह शांत हो तो वह दर्पण जैसी बन जाती है। उस दर्पण में जो दिखता है, वह उससे बहुत भिन्न होता है, जिसका अनुभव हम अपनी आँखों से कुछ देखकर कर रहे होते हैं। पर”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“ध्यान तो चेतना के गहरे तलों के पार शुद्ध चेतना की सतह पर घटित होता है। इसके लिए हमें मन को कहीं एकाग्र करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। बल्कि यह तब घटित होता है, जिस अवस्था में मन नामक कोई चीज़ बचती ही नहीं।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“कुछ भी न करने जैसा सरल काम’ हमारे लिए इतना कठिन हो जाता है”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“गहन निद्रा में हमें अपना कोई होश नहीं होता, जबकि ध्यान घटित होने पर जाग्रत अवस्था से भी अधिक होश हो जाता है।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“ध्यान के लिए हमें कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं। इसी अवस्था में हम ध्यान की अवस्था में जा पाते हैं। ध्यान में उतर कर ही हम बोध की शक्ति के केंद्र को जान पाते हैं, जो कुछ और नहीं बल्कि शुद्ध चेतना होती है। इस तरह हम शुद्ध चेतना का बोध कर पाते हैं।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“ध्यान एक ऐसा यूनिक प्रोसेस है, जिसमें कोई भी ऐक्शन नहीं करना होता।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“हमारी बोध की शक्ति हमारी उस शुद्द चेतना का एक कण मात्र है। सोचिए वह कण (बोध की शक्ति) जब इतनी महत्वपूर्ण है कि उसी से हम सब कुछ भी जान या समझ पाते हैं, तो हमारी शुद्ध चेतना कितनी व्यापक और शक्तिशाली होती होगी”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“बोध की शक्ति को विश्राम देकर ही उसे जाना जा सकता है।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“मन वही विचार प्रस्तुत करेगा, जो भाव होगा। और भाव विकसित करना आपके हाथ में हैं। मतलब यदि आपके भीतर ध्यान का भाव तीव्र हो गया, तो फिर उसके आगे मन की भी नहीं चलेगी। तो”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“पिंगला के प्रयोग से शरीर पर नियंत्रण पाया जा सकता है।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“वाक़ई उस सत्य की खोज है, जिसे ईश्वर कहते हैं, तो आपको (सुषुम्ना नाड़ी) के माध्यम से साधना करना चाहिए।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
