विकास 'अंजान'’s Reviews > पैंसठ लाख की डकैती > Status Update
विकास 'अंजान'
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वैसे तो ये पाठक सर का विमल को लेके लिखा गया चौथा उपन्यास है लेकिन ये पहली बार है की मैं विमल से रूबरू होऊँगा। बहुत रोमांचित महसूस कर रहा हूँ।
— Dec 24, 2014 11:27AM
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विकास’s Previous Updates
विकास 'अंजान'
is on page 202 of 288
उपन्यास तो ख़त्म हो गया लेकिन कुछ अधूरापन सा लगा। खैर ख़ुशी की बात ये है कि इसमें पाठक जी कि एक कहानी भी है 'मौत का विलाप'
— Dec 27, 2014 08:05AM
विकास 'अंजान'
is on page 180 of 288
अब मायाराम विमल के हत्थे चढ़ गया था। क्या वो अब दगाबाजी की सजा मायाराम को देगा ??
— Dec 27, 2014 02:56AM
विकास 'अंजान'
is on page 91 of 288
बैंक की डकैती तो कामयाब हो गयी है। लेकिन आगे कहानी क्या मोड़ लेगी ये देखना बाकी है।
— Dec 25, 2014 11:24PM

