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Kamlesh D. Patel
“भक्ति कैसी? आपने कुछ अनुभव ही नहीं किया। आप दिव्य को वास्तव में जान ही नहीं पाये। अभ्यास के बिना भक्ति अपने उद्देश्य से अलग रहती है। यह बाह्य हो जाती है। जैसे ही हम भगवान के बारे में सोचते हैं हमारी कल्पनाएँ काम करना शुरू कर देती हैं। शायद हम दिव्य सिंहासन पर बैठे एक यशस्वी अस्तित्व की कल्पना करते हैं। या फिर हम शक्ति और ऊर्जा के एक निराकार स्रोत के बारे में सोचते हैं। ईश्‍वर है लेकिन जब तक हम भीतर नहीं जाते और उसकी उपस्थिति महसूस नहीं करते, तब तक ईश्‍वर एक अवधारणा ही रह जाता है—एक मानसिक जोड़-तोड़।”
Kamlesh D. Patel, The Heartfulness Way (Hindi)

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