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जयशंकर प्रसाद
“देवि, जीवन विश्व की सम्पत्ति है। प्रमाद से, क्षणिक आवेश से, या दुःख की कठिनाइयों से उसे नष्ट करना ठीक तो नहीं।”
जयशंकर प्रसाद, ध्रुवस्वामिनी

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