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“यहाँ तक कि मिर्ज़ा की बेगम साहिबा को इससे इतना द्वेष था कि अवसर खोज-खोजकर पति को लताड़ती थीं। पर उन्हें इसका अवसर मुश्किल से मिलता था। वह सोती ही रहती थीं, तब तक उधर बाज़ी बिछ जाती थी। और”
― शतरंज के खिलाड़ी [Shatranj ke Khiladi]
― शतरंज के खिलाड़ी [Shatranj ke Khiladi]
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