“लिंकन पहुँचे ही नहीं। ली समर्पण कर चुका था। ऐसे में बूथ का मानना था कि अब लिंकन के अपहरण का कोई तुक नहीं है। अब तो उन्हें गोली ही मारनी चाहिए। 14 अपै्रल, 1865 को गुडफ्राइडे था। लिंकन फोर्ड थिएटर जाने को उद्यत थे। मैरी लिंकन के सिर में दर्द था, फिर भी वे लिंकन के कहने से जाने को तैयार हो गईं। लिंकन के सुरक्षा प्रमुख लेमन रिचमौंड चले थे; मगर वे जाते हुए लिंकन से थिएटर न जाने की गुजारिश कर गए थे। लिंकन और उनके साथ के कुछ लोग करीब 8.30 बजे थिएटर पहुँचे। नाटक शुरू हो चुका था। दर्शक बार-बार उस बॉक्स को देख रहे थे, जहाँ लिंकन और ग्रांट को बैठना था। दरअसल, टिकट से पहले ही यह घोषणा हो गई थी कि राष्ट्रपति और ग्रांट आने वाले हैं। इसी कारण एक डॉलर का टिकट ढाई डॉलर में बिका था। राष्ट्रपति के पहुँचते ही कुछ क्षणों के लिए नाटक रोककर 'प्रमुखों का स्वागत है' धुन बजाई गई।”
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Abraham Lincoln
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