(?)
Quotes are added by the Goodreads community and are not verified by Goodreads. (Learn more)
Paramahansa Yogananda

“इस वंदनीय सन्त का चित्र मेरी पुस्तक ‘‘टिबेटन योग एण्ड सीक्रेट डाक्ट्रिन्स’’1 के मुख्पृष्ठ पर दिया गया है। बंगाल की खाड़ी के तट पर उड़ीसा के पुरी शहर में श्रीयुक्तेश्वरजी से मेरी भेंट हुई थी। उस समय वे समुद्र-तट के निकट स्थित एक शान्त आश्रम के प्रधान थे तथा मुख्य रूप से युवा शिष्यों के एक दल को आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान कर रहे थे। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका तथा समस्त अमेरिका महाद्वीप एवं इंग्लैंड में गहरी रुचि दिखायी और अपने मुख्य शिष्य योगानन्दजी की, जिनसे वे हृदय से प्रेम करते थे और जिन्हें उन्होंने अपने संदेशवाहक के रूप में 1920 में पश्चिम में भेजा था, सुदूर देशवर्ती गतिविधियों, विशेष कर कॅलिफ़ोर्निया में उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों के विषय में मुझ से प्रश्न किये। श्रीयुक्तेश्वरजी का स्वभाव कोमल और वाणी मृदु थी। उनकी उपस्थिति सुखद थी और अपने शिष्यों द्वारा अनायास आदर-प्रदान के वस्तुत: वे योग्य थे। जो कोई भी श्रीयुक्तेश्वरजी से परिचित था, भले ही वह किसी भी समाज-समुदाय का क्यों न हो, उन्हें अत्यन्त आदर की दृष्टि से देखता था। आश्रम के प्रवेशद्वारा पर वे मेरे स्वागतार्थ खड़े हुए, उस समय के उनके गेरुआ वस्त्र — जो सांसारिक कामनाओं का त्याग करने वाले संन्यासी का वस्त्र है — धारण किये हुए ऊँचे, सीधे, साधु आकार का मुझे स्पष्टत: स्मरण है। उनके केश लंबे और किंचित् घुँघराले थे तथा उनका मुख श्मश्रुमंडित था। उनकी देह हष्ट-पुष्ट परन्तु पतली, सुगठित थी तथा उनके पग फुर्तीले थे। उन्होंने अपने इहलौकिक निवास के लिए पावन नगरी पुरी का चयन किया था, जहाँ भगवान जगन्नाथ के सुप्रसिद्ध मन्दिर का दर्शन करने के लिए भारत के”

Paramahansa Yogananda, Autobiography of a Yogi (Hindi)
Read more quotes from Paramahansa Yogananda


Share this quote:
Share on Twitter

Friends Who Liked This Quote

To see what your friends thought of this quote, please sign up!

0 likes
All Members Who Liked This Quote

None yet!


This Quote Is From

Autobiography of a Yogi (Hindi) (Hindi Edition) Autobiography of a Yogi (Hindi) by Paramahansa Yogananda
73,347 ratings, average rating, 3,808 reviews

Browse By Tag