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“सत्य कथा: एक समय की बात है, श्रीओम के साथ तीनसौ से ज्यादा व्यक्तियों ने पृथ्वी का सबसे बड़ा तुलिप बगैचा घूमने सुरु किया था। लेकिन, उस विशेष दिन प्राकृतिक विपरीतता थी। इसलिए वातावरण अप्रिय था, आसमान में काले बादल थे और बारिश हो रही थी। अंतरिक्ष में स्थित उन्नत मौसम निरीक्षण अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से अप्रिय वर्षा का भारी जलप्रवाह दिखाया गया था। लेकिन श्रीओम की दयालुता और करुणात्मक भावना थी, इसलिए श्रीओमने देवराज इंद्र को आदेश दिया गया कि बारिश को ठीक समय तक रोक दिया जाए। काले बादलों ने आकाश को ढँक दिया था और पानी गिर हुवा था जिससे सभी को फूलों के बगीचे घूमनेका मुस्किलहो रहा था। यहां अन्य स्थानों से आए लोगों के साथ लगभग २० हजार से अधिक महिलाएं और पुरुष उपस्थित थे। फूलों के उज्ज्वल बहुत सारे रंगों वाले फूलों ने सभी को खुश किया। श्रीओम के आदेश का पालन करते हुए स्वर्ग के राजा इंद्र ने तत्काल बादल हटा दिए और आकाश को खोल दिया, जिससे दिन भर सूर्यने श्रीओम का स्वागत किया । श्रीओमने अपने इच्छाके अनुसार, शांत जलमण्डलों की तरह सागर और नदियों में सयेन कर्ना और इस्नान करते हे , और ब्रह्मा की सृष्टि करते है। श्रीओमने अपने मार्गदर्शनसे महालक्ष्मी, सूर्य, चंद्रमा, और विभिन्न देवी-देवताओं को नम्रतापूर्वक पालन और सृजन करतेहै। श्रीओम, जो स्वयं विष्णु हैं और भगवान श्री सूर्य, भगवान पशुपतिनाथ, भवानी महालक्ष्मी को पहिली बार अपने योग ज्ञानके सुरुवातमे बताए गए थे। उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु, शिव, और देवी-देवताओं के साथ मिलकर सूर्य, चंद्रमा, और तारामंडल के साथ संसार ब्रह्मांड की सृजना और पालन करते हे तथा साधु सन्त, अध्यात्मिक भक्ति मार्गके प्राणी पण्डित महन्त सच्चा व्यक्ति तथा पूजा पाठ येग्ये कर्ने वाला ब्यक्तिवो का बिशेष रक्षा करते हे ।”

Sri Om
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