ए.आई. ने जो दिखाया - है पर है नहीं,देखा तो सही,पर वो है नहीं। सपने के जैसा- आँखों में तो है,पर छू न सकोगे। मीठा तो है,पर स्वाद कहाँ है,ढूँढ़ो तो पाओगे नहीं। विचार के जैसा,कविता के जैसा,सुंदरता के जैसा,मन को रोशन करता है,पर बोलो, है क्या कहीं?अस्तित्व माया है,कहता है संत,लेके मोबाइल फ़ोनमाया को सरकाता है,सामने कोयल कूकती है,वो बेखबर है…
© मनन शील।
Published on October 07, 2026 09:03