डॉ सोमवीर जाखड़ – एक वीराना उग आया

क्या फूल भी किसी फूल की स्मृति में उदास होते हैं? इस बात का ठीक जवाब दे सकने वाला आँखों से ओझल हो चुका था। यहीं-कहीं होने की ख़ुशबू को हाथ बढ़ाकर छुआ नहीं जा सकता था। सब एक दूसरे को छूकर पता कर रहे थे। हर छुअन में एक अतिरिक्त रुलाई दीवारों से टकरा कर दिल को बींधती रही। 

पनियल आँखों से रुलाई की लकीरों से भरे चेहरे को नहीं देखा जा सकता है। इसलिए आँखें बाहर देखना चाहती है। बाहर वीराना है। इतनी ख़ाली जगह पर सांस नहीं आती। ख़ालीपन एक भीड़ की तरह घेर लेता है। ख़ालीपन रौंदता हुआ गुज़रता है। मन पददलित होता हुआ पुकारता रहता है। कि क्या इस सब को कहीं से देख रहे हो? 
क्या आपको पता है? आपसे किसी को झगड़ने, गले लगने और रूठने-मनाने के लिए नई उम्र चाहिए होगी।

मैंने देखा आपको जीवन से भरा हुआ। प्रसन्नता से तेज़ कदम चलते हुए, चुप बैठेहुए अचानक उचक कर मुसकुराते हुए, किसी बात पर गंभीर होते हुएऔर फिर कहते हुए कि अपना तो क्या ही था। बड़ी मुश्किल से जगह बनाई।

विश्वविद्यालय के तीन नंबर गेट के पास जब हम पहुंचे तो मैंने कहा “वो सामने चायकी थड़ी और दुकान दिख रही है? हम देर रात को दोनों यहाँ बैठे थे। चुपके सेसिगरेट फूंकने वाले यूनिवर्सिटी के बच्चों की तरह एक कोने में दुबके थे।“

गेट पर सुरक्षा अधिकारी ने पूछा तो दो शब्द बोलते हुए गला भर आया“डॉ जाखड़” उन्होने कहा “प्लीज़” और आगे बढ्ने का इशारा किया। उनके चेहरे पर अफसोस उतरआया था। पहले दाएँ मोड़ मुड़ते हुए अगर कार में न होता तो कितना मुश्किल होता एक-एककदम रखना।

प्रीतिका को देखना, नहीं देख पाना था।

वे गले लगकर रो रही थी। गले लगने से उपजी रुलाई का उपाय नहीं हो सकता था।भाई ही उपचार था। इसके सिवा कोई उपचार हो सकता था तो वह रोना ही था। क्या आँसू कुछलौटा सकते हैं? क्या उनसे मन का बोझ कम हो सकता है? क्यावे दुखों का मरहम हैं? उस समय आँसू और कुछ नहीं थे, केवल आपके लिए उपजी आर्द्र पुकार भर थे। 

किसी के जाने से बने खालीपन पर लोग बहुत दिलासे देते हैं। जीवन है, संभल जाताहै। आदत हो जाती है। मन स्वीकार लेता है। इस संसार का यही चलन है। जो आता है, उसे एकदिन जाना पड़ता है। अच्छा आदमी जल्दी चला जाता है, ये विधाता का लेख है। ऐसे अनगिनत दिलासोंसे मन का कुछ नहीं बनता।

न होना एक भारी पत्थर की तरह सीने पर पड़ा रहता है।

सोमवीर, आपसे बहुत प्यार है। बहुत सारा।        






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Published on June 15, 2025 04:31
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Kishore Chaudhary
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