दांव सारे पासे के भीतर थे



कोई पासा पड़ा होता है
किसी पुरानी तस्वीर की तरह।

दिल एक नज़र देखता है
मगर कुछ सोचता नहीं।

कि पासे की चालें
उसके भीतर से मिट जाती है
जैसे तस्वीर की खुशबू
झर जाती है आंखों से।
* * *

बदन के कटाव
जैसे समय के साथ पिघलते हैं।

वैसे ही घिस जाता है पासा।
* * *
एक पासा पड़ा हुआ था धूल से सना
एक ताश का पत्ता फटा हुआ था किनारे से
एक कौड़ी गिरी पड़ी थी पीकदान के तले।

ज़िन्दगी की हर बाज़ी उदास ख़त्म होती है
कि बातें बेवजह हैं और बहुत सी हैं।
* * *
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Published on April 12, 2022 21:52
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Kishore Chaudhary's Blog

Kishore Chaudhary
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