डूब जाने दो।
मैंने कहा- "तुम्हें चूम लूँ?"
वो बोली- "हश! कश्ती डूब जाएगी"
"तो फिर क्या करें" मैंने पूछा।
वो बोली- "डूब जाने दो"
पूरे चाँद की रात - कृष्णचंदर
बादाम के शगूफ़े, जरवालों के फूलों से भरे पेड़, ख़ुश्क खुबानियाँ, मिस्री मकई के भुट्टे... मोहब्बत में जो कुछ होता है कितना मीठा होता है।
मैं कहानियों का शैदाई हूँ। मैं बेहिसाब कहानियां पढ़ने के लिए अंनत तक भागते चले जाना चाहता हूँ। मुझे खुशी है कि कहानियां मुझे कभी नहीं भूलती। हर बात पर किसी न किसी की कही कहानी याद आ जाती है।
कृष्ण चन्दर इस कहानी में जो परिवेश गढ़ते हैं, वह बेहद सुंदर है। प्रकृति की स्तुति और प्रेम पर पड़ती प्रकृति की छाया का अद्भुत रूपक रचा है।
कहानी में घटना अथवा मोड़ या चमत्कार पुराना है। जिसे अनेक कथाएं कह चुकी हैं। लेकिन मैं कहानी के भीतर उकेरी गई दुनिया से कभी बाहर न आ सका। वह मुझे बहुत पसंद आई।
एक स्टेटस देखा। उसके साथ लिखा हुआ पढ़ा तो पहले मुझे खुद की याद आई। फिर पूरा चाँद दिखाई दिया। उसके बाद मैं एक वहशी भेड़िये की शक्ल में खुद को देखने लगा। अंततः मैंने कृश्न चन्दर की कहानी को देर तक याद किया। मैं मुस्कुराया।
ये एक नशीला सुख है। दिमाग के दीवानेपन में जीते चले जाना। ऐसे में दुनिया बेगानी हो जाती है। कभी तो उसका वुजूद भी याद नहीं रहता।
स्टेटस छवि - कोमल हिरानी।
वो बोली- "हश! कश्ती डूब जाएगी"
"तो फिर क्या करें" मैंने पूछा।
वो बोली- "डूब जाने दो"
पूरे चाँद की रात - कृष्णचंदर
बादाम के शगूफ़े, जरवालों के फूलों से भरे पेड़, ख़ुश्क खुबानियाँ, मिस्री मकई के भुट्टे... मोहब्बत में जो कुछ होता है कितना मीठा होता है।
मैं कहानियों का शैदाई हूँ। मैं बेहिसाब कहानियां पढ़ने के लिए अंनत तक भागते चले जाना चाहता हूँ। मुझे खुशी है कि कहानियां मुझे कभी नहीं भूलती। हर बात पर किसी न किसी की कही कहानी याद आ जाती है।
कृष्ण चन्दर इस कहानी में जो परिवेश गढ़ते हैं, वह बेहद सुंदर है। प्रकृति की स्तुति और प्रेम पर पड़ती प्रकृति की छाया का अद्भुत रूपक रचा है।
कहानी में घटना अथवा मोड़ या चमत्कार पुराना है। जिसे अनेक कथाएं कह चुकी हैं। लेकिन मैं कहानी के भीतर उकेरी गई दुनिया से कभी बाहर न आ सका। वह मुझे बहुत पसंद आई।
एक स्टेटस देखा। उसके साथ लिखा हुआ पढ़ा तो पहले मुझे खुद की याद आई। फिर पूरा चाँद दिखाई दिया। उसके बाद मैं एक वहशी भेड़िये की शक्ल में खुद को देखने लगा। अंततः मैंने कृश्न चन्दर की कहानी को देर तक याद किया। मैं मुस्कुराया।
ये एक नशीला सुख है। दिमाग के दीवानेपन में जीते चले जाना। ऐसे में दुनिया बेगानी हो जाती है। कभी तो उसका वुजूद भी याद नहीं रहता।
स्टेटस छवि - कोमल हिरानी।
Published on March 22, 2022 04:39
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