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1, IMDb 2. Wikipedia
हो सकता है यह सिर्फ़ संयोग हो कि इस फ़िल्म के अंत में अक्षय कुमार द्वारा बोले गए संवाद के निहितार्थ, बहुत पहले फ़ेसबुक पर लिखे मेरे एक स्टेटस से मिलते-जुलते हैं। लेकिन फिर भी मैं कहूंगा कि इस तरह की घटनाओं पर नज़र रखें और देखें कि कौन-सी बात पहले कहां कही गई है। सोशल मीडिया से लेकर इलैक्ट्रॉनिक मीडिया तक पर ऐसे महापुरुषों की कोई कमी नहीं है जो साहित्यिक/वैचारिक चोरी में कोई बुराई नहीं मानते।
सोशल मीडिया के प्रसार से पहले तक हमारे विद्वान-पत्रकार-साहित्यकार आदि उन्हीं लेखों को अच्छा लेख मानते रहे हैं जिनमें लेखक के अपने विचार कम और दूसरे/पुराने लोगों/क़िताबों के विचार ज़्यादा हों। ओह माई गॉड, पीके, पीकू जैसी, अनछुए, कमछुए विषयों पर नये या अलग ट्रीटमेंट या प्रस्तुतिकरण के साथ आई फ़िल्में इंटरनेट के प्रसार के बाद बनी हैं, इस अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य को भूलने की ग़लती हरग़िज़ न करें।
(आगे और भी)
-संजय ग्रोवर
10-04-2017
Published on April 10, 2017 01:42