कभी-कभी मैं सीधे चलता हूँ। जैसे दाएं-बाएं देखे बिना बग्घी का घोड़ा चलता है। मेरे पांवों से टप-टप की आवाज़ आने लगती है। मेरे पांव एक दूजे को काटते हुए पड़ते हैं। मैं एक लंबे बालों वाली प्रेयसी में ढल जाता हूँ। उन बालों को देखे बिना मुझे ऐसा महसूस होता है कि मेरे बाल हवा में उड़ रहे हैं। मैं सोचता हूँ कि उन दो आँखों तक पहुंच गया हूँ। उन तक पहुंचकर मुस्कुराता हूँ कि उनकी आँखों में झांकते हुए मैंने बाइस्कोप देखते बच्चे की तरह अपनी आंखें दोनों हाथों से ढक ली हैं।
मैंने कभी प्यार नहीं किया मगर...
Published on January 16, 2019 21:52