यादों की सुरंगें
मैंने अचानक फोन ऑन किया. मुझे याद आया कि कोई मेसेज बहुत दिनों से पड़ा है. उसे जवाब नहीं दिया. बस कॉल किया.मैंने पूछा- "तुम्हारे पास समय है?"
उसने कहा- "आपको ये नहीं पूछना चाहिए. आपके लिए कभी भी..."
मुझे लगा कि शायद उसने अपने आस-पास देखा होगा. पल भर में लिए तय किया होगा कि बात करे या बाद में फोन पर बात करने का कह दे.
उसने कहा- "आप बहुत अच्छा लिखते हैं"
मैंने कहा- "एक ज़रूरी काम से फोन किया है तुमको"
उसे ज़रूर अचरज हुआ होगा. उसने कहा भी- "मुझसे ?"
मैंने कहा- "हाँ"
मैं सोच रहा था कि उसके चेहरे पर मुस्कान आई है. उसे बहुत कुछ भूल गया है. जितनी परेशानियाँ उसे घेरे रही होंगी, उन पर किसी अविश्वसनीय बात ने बम गिरा दिया है. सब दिक्कतें ढहने लगी हैं.
उसने कहा- "मुझे लगा कि कहीं बैठ जाना चाहिए तो मैंने यही किया है."
मैं चुप रहा.
उसने कहा- "हेलो. आप हैं उधर?"
"हाँ"
"बताइए क्या कहना था?"
मैंने कहा- "मुझे बहुत दिनों से लगता है कि मैंने बहुत सारे चूहे पाल लिए हैं. मैं उनकी ज़रूरतें पूरी करता हूँ. वे दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं.उनके बढ़ने के साथ-साथ मेरे को और ज्यादा काम करना पड़ता है. मैं दफ्तर से भागता हुआ घर आता हूँ. मैं दफ्तर डरा-डरा जाता हूँ. मुझे वहाँ भी लगता है कि चूहे हैं. कोई उनको कुचल न दे. कोई उनको दुःख न पहुंचाए. एक रोज़ मैंने पाया कि चूहे बहुत बढ़ गए हैं. मैं उनके नीचे दब गया हूँ. मैं जिन चूहों से इतना प्रेम करता था. जिनको मैंने इस तरह पाला था. उनको ही लात मार दी. अचानक चूहे, मुझसे दूर एक दूजे पर कूदने लगे."
उसने पूछा- "सचमुच ऐसा है या कोई सपना या कहानी कह रहे हैं?"
मैंने कहा- "ज़रूरी बात ये नहीं है कि ये सपना है या कहानी ज़रूरी बात ये है कि तुमसे पूछना था. मैंने लात मार कर अच्छा किया या नहीं.?"
उसने कहा- "अच्छा किया"
मैंने कहा- "थैंक यू. सॉरी मैं तुमसे इतने दिन तक बात न कर पाया. अच्छा बताओ, तुमको मुझसे क्या बात करनी थी.?"
उसने कहा- "मैंने भी चूहे पाल लिए थे."
फिर हम दोनों हंसे. हमने तय किया कि फिर कभी बात करेंगे. उसने मुझसे पूछा- "क्या जब कभी हम मिलेंगे तो शराब पियेंगे?"
मैंने पूछा- "उससे क्या होता है?"
उसने कहा- "होता कुछ नहीं, बस थोड़ी हेल्प करेगी."
* * *
उससे बात करके मैं सोचता रहा कि एक ही बात को कितने लोग एक ही तरीके से बोलते हैं न. एक लड़की थी. उसने कभी यही कहा था. हम कभी नहीं मिले. ये बात कहने के बाद से अब तक उसका बेटा स्कूल जाने लगा. उसके बेटे को एक छोटा भाई भी मिल गया.
यादों की सुरंगें कहाँ से कहाँ जाती है, कोई नहीं जान सकता. मैंने भी किस याद से बाहर आने को फोन किया और जाने किस याद में जा गिरा.
[Painting image courtesy : Shanna Bruschi]
Published on November 11, 2017 01:12
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