कि कहां तक
चाय का मग खिड़की के बीच रखा रहता। चिड़िया बालकनी में बंधे तार पर बैठी रहती।मैं जब भी चाय बनाकर लाता। मग को खिड़की में रखता और चिड़िया को खोजने लगता। कभी-कभी चिड़िया आ जाती थी और कभी देर तक सूनापन बना रहता। फिर मैं सोचता कि क्या एक चाय और बना लूँ?
मैं बार-बार बाहर झांकता कि क्या चिड़िया लौट आई है। बिस्तर पर अधलेटा, कुर्सी में धंसा हुआ होता कि अचानक यकीन आता। उसे आना ही चाहिए कि कहानी में गोली चलने से पहले ही सब मुर्गाबियाँ उड़ जाती थी। वह तो एक चिड़िया जो अपनी मर्ज़ी से बालकनी में आती है।
मैं फिर कहानी के पन्ने को देखने लगता और याद करता कि कहां तक पढ़ा था...* * *
गुलाब के फूल का गलमा बाहर था. एक बकरी आई और इसके फूलों और पत्तियों को साफ़ कर गयी. तना और शाखाएं बची रह गयी. बस एक गमला था और गमले में सूनी शाखाएं. मैंने कहा कि कोई बात नहीं. अगर ज़िन्दगी बची है तो फिर से हरिया जाएगी. कुछ रोज़ बाद एक नन्हीं सी कोंपल का फूटना दिखाई दिया. दिल ने आराम लिया. जरा आहिस्ता से धड़का. फिर कुछ रोज़ बाद पत्तियां आ गयीं. फिर ये वाला फूल भी आ गया.
दुःख अकसर सबकुछ बुहार कर ले जाता है. मगर हम बचे रहें तो जीवन फिर से खिल उठता है. * * *
Published on November 02, 2017 22:45
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