कृश्न चन्दर
Born
in वज़ीराबाद , India
November 23, 1914
Died
March 08, 1977
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एक गधे की आत्मकथा [Ek Gadhe Ki Atmakatha]
by
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published
1968
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22 editions
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कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ
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“...मगर 'हैसियत' शब्द कितना सरल और खुला हुआ है जैसे किसी ने सर पर सात जूते मार दिए हों और 'एफोर्ड' में कितनी गुंजाइश है। वैसे अपनी भाषा में कभी-कभी विदेशी और अजनबी शब्द भी प्रयोग कर लेने से कितनी बचत हो जाती है।
-शहज़ादा”
― कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ
-शहज़ादा”
― कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ
“कभी-कभी मैं सोचता हूँ : एक स्त्री और एक टाइप-राइटर में क्या अन्तर है, जरा गुदगुदाओ , मुस्कुराहट बाहर।
- मंत्रियों का क्लब”
― कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ
- मंत्रियों का क्लब”
― कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ
“बी. ए. की डिग्री तो एक बेकार, कागज का टुकड़ा है। वे दिन लद गए, जब बाप आलू-छोले बेचता था और बेटा बी. ए. पास करके, झट डिप्टी बन जाता था। अब तो स्थिति यह है कि यदि बाप डिप्टी है तो बेटा आलू-छोले बेच रहा है।
- बैचलर आफ आर्ट्स”
― कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ
- बैचलर आफ आर्ट्स”
― कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ


