कृश्न चन्दर

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कृश्न चन्दर


Born
in वज़ीराबाद , India
November 23, 1914

Died
March 08, 1977


कृश्न चन्दर या 'कृष्ण चन्दर' हिन्दी के प्रमुख यशस्वी कथाकार थे। वे हिन्दी और उर्दू के कहानीकार थे। उन्हें साहित्य एवं शिक्षा क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1969 में 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया था। उन्होंने मुख्यतः उर्दू में लिखा, किन्तु भारत की स्वतंत्रता के बाद मुख्यतः हिन्दी में लिखा।

कृश्न चंदर का जन्म गुजरांवाला, पाकिस्तान में हुआ था. पूत के पांव पालने में ही दिख गए थे. स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही अपने मास्टर पर व्यंग्य लिखकर उन्होंने पिता की मार और कसम खाई कि अब ऐसा नहीं करना है. पर ऐसा नहीं हो पाया. पढ़ाई के बाद आकाशवाणी में नौकरी तो लगी पर जी नहीं. 1939 में शाया (प्रकाशित) होने वाले कहानी-संग्रह ‘नज़ारे’ की भूमिका में कुछ यूं लिखा- "उस कृश्न चंदर की याद में, जिसे गुज़िश्ता नवम्बर की एक थकी और उदास शाम को ख़ुद इन हाथों ने गला घों
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Average rating: 3.93 · 378 ratings · 42 reviews · 2 distinct works
एक गधे की आत्मकथा [Ek Gadhe...

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really liked it 4.00 avg rating — 566 ratings — published 1968 — 22 editions
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कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहान...

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Quotes by कृश्न चन्दर  (?)
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“...मगर 'हैसियत' शब्द कितना सरल और खुला हुआ है जैसे किसी ने सर पर सात जूते मार दिए हों और 'एफोर्ड' में कितनी गुंजाइश है। वैसे अपनी भाषा में कभी-कभी विदेशी और अजनबी शब्द भी प्रयोग कर लेने से कितनी बचत हो जाती है।

-शहज़ादा”
कृश्न चन्दर, कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ

“कभी-कभी मैं सोचता हूँ : एक स्त्री और एक टाइप-राइटर में क्या अन्तर है, जरा गुदगुदाओ , मुस्कुराहट बाहर।

- मंत्रियों का क्लब”
कृश्न चन्दर, कृश्न चन्दर की विशिष्ट कहानियाँ

“बी. ए. की डिग्री तो एक बेकार, कागज का टुकड़ा है। वे दिन लद गए, जब बाप आलू-छोले बेचता था और बेटा बी. ए. पास करके, झट डिप्टी बन जाता था। अब तो स्थिति यह है कि यदि बाप डिप्टी है तो बेटा आलू-छोले बेच रहा है।
- बैचलर आफ आर्ट्स”
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