Sarveshwar Dayal Saxena (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ) > Quotes > Quote > Devansh liked it

“चाँदनी की पाँच परतें,
हर परत अज्ञात है ।

एक जल में,
एक थल में,
एक नीलाकाश में ।
एक आँखों में तुम्हारे झिलमिलाती,
एक मेरे बन रहे विश्वास में ।
क्या कहूँ , कैसे कहूँ.....
कितनी जरा सी बात है ।
चाँदनी की पाँच परतें, हर परत अज्ञात है ।

एक जो मैं आज हूँ ,
एक जो मैं हो न पाया,
एक जो मैं हो न पाऊँगा कभी भी,
एक जो होने नहीं दोगी मुझे तुम,
एक जिसकी है हमारे बीच यह अभिशप्त छाया ।
क्यों सहूँ ,कब तक सहूँ....
कितना कठिन आघात है ।

चाँदनी की पाँच परतें, हर परत अज्ञात है ।”
Sarveshwar Dayal Saxena (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना )

No comments have been added yet.