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“जिन स्थानों में हम रहते हैं, अगर वे न रहें…तो उनमें रहनेवाले प्राणी, वह तुम्हारे माँ-बाप ही क्यों न हों…बेगाने हो जाते हैं…जैसे उनकी पहचान भी कहीं ईंटों के मलबे में दब जाती हो…”
― अन्तिम अरण्य
― अन्तिम अरण्य
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