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“बहूत दिनों बाद हुई थी मुलाकात तुमसे इतनी जल्दी मे थी की हो न पाई बात तुमसे गई कह कर की जल्दी आ रही हूँ कट गई वही कम्बख़त बैठे रात हमसे नज़र में इंतज़ार की समा जल रही थी दिल को ऐतबार था तुम पर पलके बिछा बैठा रस्ता तक थक गये नयन तु फिर भी ना आई करने बात हमसे”
Adarsh Rathor, एहसासों के पन्ने ( Ehsaason Ke Panne ): काव्य संग्रह

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