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“आज फिर से उनकी याद आई भूलने की थी कोशिश पर आँखें रोई आँखों से बरसात आई आती हैं न जाने क्यों वो याद इतना हैं रस्तें अलग अलग हम दोनों के आज फिर से उन साथ चलने वाले रास्तों की याद आई भूलने की थी कोशिश पर न जाने क्यों ऐसा लगा वो साथ चलने रास्तों पर फिर से मेरे साथ आई आज फिर से उनकी याद आई मुक्मल खुश थे अपने अपने मंजिलो को बदल के हम दोनों उस पल, उस लम्हें, उस समय ना जाने क्यों यें खुशी रास आई भूलने की थी कोशिश पर न जाने क्यों उन मंजिलो की झलक दिखी और उसके बुलाने की आवाज़ आई आँख रोई आँख से बरसात आई आज फिर से उनकी याद आई”
Adarsh Rathor, एहसासों के पन्ने ( Ehsaason Ke Panne ): काव्य संग्रह

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