Anu Singh Choudhary > Quotes > Quote > Rituraj liked it
“ये मन भी अजीब जंतु है। शरीर की दशा-दिशा, हालत-मकसद, ताकत-आदत और सीमाओं का कभी ख्याल नहीं रखता। शरीर होता कहीं है और मन शरीर को लिए कहीं और जाता है। मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ते मन सबसे पापी हो सकता है और किसी का गला रेतते हुए यही जटिल मन गंगास्नान-से भाव में डूबा हो सकता है। ब”
― Neela Scarf
― Neela Scarf
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