Gautam Rajrishi > Quotes > Quote > Alok liked it

Gautam Rajrishi
“तू जिसकी ताक में मचान पर यूँ बेक़रार है बग़ल की शाख़ से वो तेरा करने को शिकार है उलझ पड़ा था एक बार जुगनुओं की टोली से हरेक रात तब से आफ़ताब वो फ़रार है ले मुट्ठियों में पेशगी महीने भर मजूरी की वो उलझनों में है खड़ा कि किसका क्या उधार है मैं रोऊँ अपने क़त्ल पर या इस ख़बर पे रोऊँ मैं कि क़ातिलों का सरग़ना तो हाय मेरा यार है इ”
Gautam Rajrishi, Paal Le Ik Rog Nadaan

No comments have been added yet.