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सुरेन्द्र मोहन पाठक
“जिंदगी को एक सिग्रेट की तरह एंजाय करो, वरना सुलग तो रही ही है, एक दिन वैसे ही खत्म हो जानी है।”
Surender Mohan Pathak, चोरों की बारात

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