धर्मवीर भारती > Quotes > Quote > Annu liked it

धर्मवीर भारती
“मेरे लिए इस उपन्यास का लिखना वैसा ही रहा है जैसे पीड़ा के क्षणों में पूरी आस्था के प्रार्थना करना, और इस समय भी मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं वह प्रार्थना मन-ही-मन दोहरा रहा हूँ, बस…”
धर्मवीर भारती, गुनाहों का देवता

No comments have been added yet.