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Conflict Resolution: The RSS Way
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[Closed] Added Books/Editions > [Done]संघर्ष का समाधान: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शैली

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Ajay Thakur | 2645 comments * Title: संघर्ष का समाधान: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शैली

* Author: Ratan Sharda, Yashwant Pathak
*Foreword: Ved P. Nanda

*ISBN: 9391154573, ‎ 978-9391154578

* Publisher: Suruchi Prakashan

* Publication: 30 September 2025

* Page count: 488

* Format: Paperback

* Description: “सुप्रसिद्ध लेखक और आरएसएस के जानकार या यूँ कहें इतिहासकार श्री रतन शारदा द्वारा लिखित यह पुस्तक संघ संबंधी साहित्य को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्य है। आरएसएस द्वारा समय-समय पर पारित नीतिगत प्रस्तावों के आधार पर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष समाधान का मुल्यांकन अथवा आकलन करने में यह पुस्तक एक उत्कृष्ट कृति है।" पीयूष गोयल, कैबिनेट मंत्री, भारत सरकार --------------------------------------------------------------------------------- “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शायद ही कभी गंभीर और वस्तुनिष्ठ अकादमिक मूल्यांकन का विषय रहा है और इसके बरे में विद्वतापूर्ण कार्यों में भी इसे बदनाम करने का प्रयास किया गया है, ऐसा खासकर पूर्वाग्रह से ग्रसित पाश्चात्य जगत के विद्वानों द्वारा किया गया है... गहन शोध, ऐतिहासिक संदर्भ और अभिलेखीय प्रलेखनों अथवा प्रमाणों के माध्यम से श्री रतन शारदा और श्री यशवंत पाठक ने शायद पहली बार संघकी आवाज़ को राष्ट्रीय महत्व के अनेक मुद्दों पर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।" डॉ. विक्रम संपत इतिहासकार, लेखक, सावरकर जीवनी (खंड और 2) --------------------------------------------------------------------------------- "यह पुस्तक “संघर्ष का समाधान: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शैली" भारत को दशकों से लहूलुहान करने वाले तीन प्रमुख संघर्षों अर्थात्‌ कश्मीर, पंजाब और पूर्वोत्तर पर अनूठी अंतर्दष्टि प्रदान करती है। ठोस तथ्यों पर आधारित, आरएसएस के कार्यकर्ताओं के जमीनी अनुभवों से परिपूर्ण और समावेशी राष्ट्रवाद के दृष्टिकोण लिखी गई यह पुस्तक बहुत से मिथकों को ध्वस्त करती है।" गौतम चिकरमाने, शोधकर्ता, लेखक --------------------------------------------------------------------------------- “लेखकों ने अब तक अनदेखे दस्तावेजों पर सूक्ष्मता से विश्लेषण किया है, ताकि हमारे सामने इस बात का व्यापक चित्र प्रस्तुत किया जा सके कि दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन ने भारत की स्वतंत्रता और अखंडता में कैसे योगदान दिया और साथ ही हिंदू समाज के सांस्कृतिक और राजनीतिक हितों की रक्षा कैसे की। यह पुस्तक उन सभी लोगों के लिए पढ़ना अत्यंत आवश्यक है जो भारत और 925 में अपनी स्थापना के बाद से सरकार और समाज दोनों को दिशा देने में आरएसएस द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका में रुचि रखते हैं।" प्रो. मकरंद आर. परांजपे, प्रोफेसर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, स्तंभकार और लेखक

*Language: Hindi

*Link: https://www.amazon.in/Sangarsh-Ka-Sam...


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