vishal dholiya

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विभिन्न प्रकार की यातनाएँ दी जाती थीं, नंगे बदन को हील वाली काँटेदार बूट से कुचला जाता था। पैरों के तलवे पर छड़ी बरसाई जाती थी। घुटने से लेकर पंजे तक की हड्डी पर पुलिस की लाठियाँ घुमाई जाती थीं। पीडि़त को घंटों तक छोटी सी जगह में पैर मोड़कर बिठाया जाता था। रीढ़ की हड्डी पर डंडे बरसाए जाते थे। दोनों कानों पर तब तक तमाचे जड़े जाते थे, जब तक कि पीडि़त होश न खो बैठे। राइफल के बट से पिटाई, शरीर के अंदर बिजली के नंगे तारों को घुसाया जाता था। सत्याग्रहियों को नंगे बदन बर्फ की सिल्लियों पर लिटाया जाता था। सिगरेट या मोमबत्तियों से त्वचा को जलाया जाता था। खाना, पानी और नींद के बिना तड़पाया जाता था और ...more
इमरजेंसी की इनसाइड स्टोरी
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