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सवाल जो लंबे समय तक सवाल बने रहते हैं हम उनके एक-दो नकली जवाब सोच लेते हैं। जो सच नहीं होते लेकिन झूठ भी नहीं होते। और सबसे अच्छी बात ये होती है कि इन नकली जवाबों के साथ जीना बहुत आसान हो जाता है।
(हाँ, चक्कर ही बोलेंगे उसको प्यार नहीं, जो भी प्यार पूरे नहीं हो पाते उनको चक्कर ही बोला जाता है न, प्यार पूरे होने का केवल और केवल इतना मतलब है कि आपने जिस लड़की को I love you बोला था उसके घर आप बैंड बाजे के साथ पहुँच पाए। आगे शादी चले, न चले उससे प्यार के पूरे और अधूरेपन पर कोई असर नहीं पड़ता)।
अक्सर अजनबी लोग बड़े सही रहते हैं, उनको कुछ भी बता दो। अंजान लोग कुछ ही देर में हमारे बारे में इतना जान जाते हैं जितना कभी करीबी नहीं जान पाता। हम अपने करीबी लोगों के लिए भी तो उम्रभर अजनबी ही रहते हैं। इस बंदी ने अपना नंबर बड़ी ही आसानी से मुझे दे दिया और मैंने भी कहा था कि लखनऊ में पक्का मिलते हैं कभी।
पता नहीं अगर कभी कोई हिसाब लगाता कि समाज ने कितने घरों को जोड़ा और कितनों को तोड़ा है तो शायद ही समाज दुनिया की किसी भी कॉलोनी में मुँह दिखाने लायक बचता।
सालों के बीतने से भले उम्र बढ़ती हो लेकिन बड़े तो हम ऐसे ही किसी दोपहर, शाम या रात में एकदम से हो जाते हैं।
आँसू बड़े अजीब होते हैं अक्सर रिश्ते टूटते वक्त अपनी शक्ल
गुस्से में शायद कभी आँसू न निकलते हो, लेकिन बहुत गुस्से में अक्सर आँसू निकल आते हैं।
शरीर जुड़कर भी कई बार दो लोग बिल्कुल पास नहीं आ पाते, कुछ खाली छूट जाता है। जो खाली छूट जाता है वो फासला तब तय होता है जब दो लोग आँसू से जुड़ते हैं। जब

