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कसप
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कसप

4.25  ·  Rating details ·  101 ratings  ·  15 reviews
कसप लिखते हुए मनोहर श्याम जोशी के आंचलिक कथाकारों वाला तेवर अपनाते हुए कुमाऊँनी हिन्दी में कुमाऊँनी जीवन का जीवन्त चित्र आँका है। यह प्रेमकथा दलिद्दर से लेकर दिव्य तक का हर स्वर छोड़ती है लेकिन वह ठहरती हर बार उस मध्यम पर है जिसका नाम मध्यवर्ग है। एक प्रकार से मध्यवर्ग ही इस उपन्यास का मुख्य पात्र है। जिन सुधी समीक्षकों ने कसप को हिन्दी के प्रेमाख्यानों में नदी के द्वीप के ...more
Hardcover, 312 pages
Published by Rajkamal Prakashan (first published January 1st 2007)
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Ankita Jain
Dec 24, 2019 rated it it was amazing
इससे पहले प्रेम पर कोई सुंदर किताब 2012 में पढ़ी थी। ओम प्रकाश चतुर्वेदी जी की 'कटते हुए'। वह छोटी सी किताब थी। लेकिन कुछ-कुछ इसी तरह प्रेम के मनोविज्ञान पर आधारित।

उसके बाद अब यह पढ़ी, 'कसप'। प्रेम कथा के हर कोण पर उसके साथ-साथ चल रहे मनोविज्ञान की व्याख्या और उससे बँधे रहना इस किताब के ज़रिए प्रेम का एक अलग ही रस प्रस्तुत करता है। कह सकती हूँ कि जब किताब का रस मिलने लगा तो पहला ख़याल यही आया कि इसे पढ़ने में इतनी देर क्यों की मैंने।

कहानी में सबसे ज़्यादा आकर्षक नायिका है। उसका किरदार आश्चर्यज
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Ashutosh Rai
समीक्षा पढ़ने दो तरह के लोग आते हैं. एक तो वो, जिनको किताब के बारे में पता चला है, और देखना चाहते हैं समीक्षाएं पढ़कर कि किताब पढ़ने लायक है की नहीं. और दुसरे वो, जिन्होंने किताब पढ़ ली है, और अब समीक्षाएं पढ़कर देखना चाहते हैं कि और लोगों ने भी वैसा ही सोचा किताब के बारे में जैसा उन्होंने, या उनसे कुछ "मिस" हो गया.

पहली केटेगरी के सुधी पाठकों को स्पॉयलर न देते हुए इस प्रेम कथा (मान के चल रहे कि इतना तो पता होगा) के बारे में ऐसी बातें बताना, जिससे उनको ये निर्णय लेने में आसानी हो, आसान काम नहीं
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Jyoti Joshi
Jun 04, 2015 rated it it was amazing
This hindi Novel is a soul quenching experience for the Kumaonis and Garhwalis staying away from Pahad ( Hills). The language is full of pahadi(Dialect used in Hills of Uttarakhand in India) words which only a pahadi( Highlander) can feel. Pahad ( Hills of Uttarakhand) literally comes to life while reading this book. The easy meanings of the pahadi words used, helps the readers not knowing those words.
At first it took me some time to adjust to writing style of the writer, and once you get into t
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Aditya Narayan
Oct 05, 2018 rated it really liked it  ·  review of another edition
चार दशमलव आठ

सैप आप कुमाउनीं नहीं जानते रहे होंगे। सैप आप पहाड़ी नहीं होंगे, हो भी सकते हैं, मैदानी या जंगली भी हो सकते हैं। पर सैप क्या आप कभी अकेले में बैठकर फूट फूट कर रोए हैं और जान नहीं पाए किस बिल्लो बात पर यूं रोना आया? अभी कुछ दिन पूर्व हिंदी साहित्य पर काल्पनिक लानतें भेजते हुए मैंने मन ही मन एक लाइन लिखी 'हिंदी साहित्य एक अजीब किस्म की निष्क्रिय रूमानियत' से परिपूर्ण है। सैप यह सब अलग विमर्श का विषय ठहरा। हम तो यहां नाजुक मिजाज प्रेमी ठहरे। हम को बहुत रोना आता है, इसी वजह कई प्रेमिकाएं
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Manish Kumar
Jul 03, 2013 rated it really liked it
मेरा उत्तरांचल से क्या संबंध है? कुछ ख़ास नहीं। बस इतना भर कि रुड़की में मैं डेढ़ वर्ष रहा हूँ और प्रवीण सिंह खेतवाल जो मेरे यात्रा विवरणों में आपको हमेशा दिखाई पड़ते हैं और मेरे अभिन्न मित्र हैं, खुद कुमाऊँ से हैं।
पर रुड़की का मेरा प्रवास हो या खेतवाल जी का सानिध्य, कोई मुझे उत्तरांचल की मिट्टी के इतने पास नहीं ले गया जितना वो शख़्स जिससे मैं कभी नहीं मिला और ना ही मिल पाऊँगा। जी हाँ, मैं मनोहर श्याम जोशी जी की बात कर रहा हूँ।

आज आपके समक्ष जोशी जी के एक अलग तरह के उपन्यास 'कसप' की चर्चा करूँगा।
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Saurabh Manju
Sep 02, 2018 rated it it was amazing
कसप एक बहुत ही खूबसूरत प्रेम कहानी है। मनोहर जी को इस उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी अवार्ड मिला था। यह उपन्यास मानवीय रूपों, दर्शन और आंचलिकता का पूरा संग्रह है। कहानी के मुख्य पात्र भी समय के साथ परिपक्व होते जाते हैं। और सार ये कहता है कि जिंदगी में आप सब कुछ नहीं हासिल कर सकते, ज़िन्दगी के दोराहे पर दिल या दिमाग में से किसी एक का चुनाव करना कठिन होता है। लेकिन कोई भी रास्ता आप चुनें, गम और खुशी दोनों ही मिलती है, समुद्र मंथन से निकलने वाले अमृत और विष की तरह। दोनों को अभिशप्त करना ही जीवन का ...more
Shashank
Aug 01, 2013 rated it it was amazing
Is is an unique experience to read this one......You will end up with many questions to ponder upon. A perfect literature piece....It couldn't have been better.
Pratap Mishra
Mar 10, 2020 rated it really liked it
The storyline of the book is not very unusual. But the language is very good (mostly the Kumauni language). The book is very smooth and likable. The character profiling of the protagonists are sketched nicely. A good read.
shubham dubey
May 10, 2020 rated it really liked it  ·  review of another edition
Badhia

Bhasa thodi alag hai.. Likhne ka dhang alag hai.. Lekin kahani acchi hai. Agar naye pathak hain.. To phle kam se kam.. Hindi sahitya ki 10 se adhik kitaben padh le.. Tab hi ise hath lagaye.. Anyatha.. Aapko padhne me kasth hoga. 😊
Naresh Adhikari
Apr 24, 2020 rated it really liked it
Kitaab ke baare me kya kahun, parhte hue ya yun kahe pura parhne ke baad ek ajeeb sa, meetha meetha sa dard feel hua, jisko aap describe shayad na kar paaye. Pata nahi kya. Achha upanayas hai.
Anil Kumar
Feb 03, 2020 rated it really liked it
Loved the book
Read as audiobook from storytel
Liked the expectonal and unique content and style of writing
Kuldeep Sompura
कसप

अब हम क्या इस कहानी को तोलमाप करने वाले ठहरे।मुझे ये कहानी बहुत अच्छी लगी कि में इसे एक बार फिर से पढ़ना चाहूँगा दो चार साल के बाद।
Ved Prakash
Jul 15, 2016 rated it it was amazing
रिव्यु(review) में क्या लिखूं !

बहुत ही बेहतरीन लेखनी।

सोलह-सतरह साल की लड़की और बाईश-चौबीस साल के युवक की प्रेम कहानी में प्रेम है....जीवन दर्शन है....जीवन का सार...रिश्तों का सार.....समाज का सार छुपा है। जीवन संघर्ष की भी कहानी है...उत्थान में छुपा हुआ पतन और पतन में भी छुपा हुआ उत्थान.... दुत्कार में भी छुपा प्यार....प्यार में भी छुपा तिरस्कार......मौन में छुपा गहन वार्तालाप....वर्तालाप में छुपा मौन....

बहुत कुछ पाठक के इन्टरप्रेट( interpret) करने के ढंग पर भी निर्भर करता है।

मुख्य कहानी के सामान
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Shashank Bhartiya
Jan 17, 2019 rated it it was amazing
हिंदी साहित्य के प्रेम आख्यान की बात करें तो इसे श्रेष्ठतम कहानियों में रखने में मुझे कोई हिचक नहीं होगी। आलोचकों ने इस कहानी को नदी के द्वीप के बाद हिंदी साहित्य की दूसरी बड़ी उपलब्धि माना है। हल्की फुल्की सी लगने वाली प्रेम कहानी अंत तक आते आते इतने उतार चढ़ावों से होकर इतनी बेधक और बेदर्द हो जाएगी उम्मीद न थी। जोशी जी ने अपने सिनेमा जगत के अनुभवों के बेहत्तरीन ढंग से पिरोया है।
Rohit Bhoraskar
Oct 31, 2018 rated it really liked it
गुनाहों का देवता , नदी के द्वीप जैसी प्रेम कहानी वाली एक और अच्छा उपन्यास । कुमाऊनी पृष्ठभूमि में लिखे होने के कारण लेखक द्वारा कुमाऊनी हिंदी का प्रयोग दिलचस्प लगता है ।

अवश्य पढ़ें
Sandeep Tyagi
rated it it was amazing
Sep 02, 2019
Ravi Gupta
rated it really liked it
Apr 06, 2020
Nisha Kamal
rated it it was amazing
Jul 23, 2017
Krishna
rated it really liked it
Sep 03, 2015
Yashraj Mishra
rated it it was amazing
Apr 29, 2020
Gaurav Negi
rated it really liked it
Oct 18, 2015
Pankaj
rated it really liked it
Mar 13, 2016
Gunjan Dhir
rated it really liked it
Jan 25, 2018
Saurabh Tiwari
rated it it was ok
Dec 10, 2019
Akash Kumar
rated it it was amazing
Dec 03, 2018
Vaibhav Srivastava
rated it really liked it
Mar 27, 2020
Khan
rated it did not like it
Feb 13, 2018
Gopal Sharma
rated it did not like it
Oct 17, 2018
Ashish Arora
rated it it was amazing
Sep 20, 2019
Sheshnath
rated it it was amazing
Jan 01, 2019
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