भारतीय पौराणिक साहित्य-भंडार में एक-से-एक अप्रतिम बहुमूल्य रत्न भरे पड़े हैं। अष्टावक्र गीता अध्यात्म का शिरोमणि ग्रंथ है। इसकी तुलना किसी अन्य ग्रंथ से नहीं की जा सकती। अष्टावक्रजी बुद्धपुरुष थे, जिनका नाम अध्यात्म-जगत् में आदर एवं सम्मान के साथ लिया जाता है। कहा जाता है कि जब वे अपनी माता के गर्भ में थे, उस समय उनके पिताजी वेद-पाठ कर रहे थे, तब उन्होंने गर्भ से ही पिता को टोक दिया था—च्शास्त्रों में ज्ञान कहाँ है? ज्ञान तो स्वयं के भीतर है! सत्य शास्त्रों में नहीं, स्वयं में है।ज् यह सुनकर पिता ने गर्भस्थ शिशु को शाप दे दिया, च्तू आठ अंगों से टेढ़ा-मेढ़ा एवं कुरूप होगा।ज् इसीलिए उनका नाम च्अष्टावक्रज् पड़ा। च्अष्टावक्र गीताज् में अष्टावक्रजी के एक-से-एक अनूठे वक्तव्य हैं। ये कोई
Helped a lot to open my eyes when you plan to read Bhagavad gita plan Ashtavakra Geeta. Why because gita takes you up in sky and Ashtavakra takes you back in ground.