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भारत विभाजन

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स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री और 'लौह पुरुष' की उपाधि प्राप्त सरदार पटेल कांग्रेस के एक प्रमुख सदस्य थे। पूर्ण स्वराज्य प्राप्त करने के उद्देश्य से स्वतंत्रता आदोलन में उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई । सरदार पटेल दो समुदायों के बीच आंतरिक मतभेद उत्पन्न करके 'बाँटो और राज करो' की ब्रिटिश नीति के कट्टर आलोचक थे। सरदार पटेल के विस्तृत पत्राचार के आधार पर प्रस्तुत पुस्तक में भारत विभाजन किन परिस्थितियों में और किन-किन कारणों से हुआ, भारतीय नेताओं की मनःस्थिति तथा तत्कालीन समाज की मन :स्थिति का साक्ष्यों के प्रकाश में विस्तृत वर्णन किया गया है । भारत विभाजन के काले अध्याय का सप्रमाण इतिहास वर्णित करती एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक।

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Vallabhbhai Patel

17 books4 followers

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1 star
6 (7%)
Displaying 1 - 2 of 2 reviews
Profile Image for Ashutosh Agnihotri.
14 reviews6 followers
July 5, 2019
सरदार पटेल के विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम दो दशकों की घटनाओं के बारे में
भाजपा और भारतीय दक्षिणपंथ के तीव्र दुष्प्रचार और विज्ञापन की वजह से बहुत से मुद्दों को धुंधला और परिवर्तित करके अलग तरह से प्रचारित किया जा रहा है। यह सरदार पटेल का राजनैतिक फायदा उठाने की एक मुहिम बनी हुई है। यह स्थिति इस किताब को बहुत महत्वपूर्ण बनाती है।

इस किताब में सरदार पटेल के सारे पत्र, भाषण, और उस दौर में अखबारों में आए हुए तमाम कथ्यों का संकलन है। यह विशेष महत्व रखती है उनके लिए जो इन मुद्दों पर सरदार के विचारों को और उस दौर की घटनाओं पर उनका नजरिया जानना चाहते हैं।

सरदार का धर्मनिरेक्षतावाद, हिंदू मुस्लिम एकता के प्रति आग्रह, काश्मीर पर उनका नेहरू से समर्थन, नेहरू की सराहना, गांधी हत्या पर तत्कालीन उग्रवादी आरएसएस के प्रति गुस्सा सब कुछ इसमें स्पष्ट होता है।

इसे हर उस व्यक्ति को पढ़ना अनिवार्य है जो भारत विभाजन के यथार्थ, उसमें कॉन्ग्रेस और सरदार के रोल, उनके द्वारा गांधी जी को सहमत करवाने और सांप्रदायिक ताकतों के साथ उनका संघर्ष उनके ही शब्दों में जानना चाहते हैं।
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Profile Image for Arjun Arya.
1 review
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July 10, 2022
Thus platform is fraud,
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