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348 pages, Hardcover

First published January 1, 1962

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रांगेय राघव

46 books12 followers
रांगेय राघव हिंदी के उन विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभावाले रचनाकारों में से हैं जो बहुत ही कम उम्र लेकर इस संसार में आए, लेकिन जिन्होंने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वंय को प्रतिस्थापित कर दिया, साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन करा दिए।आगरा में जन्मे रांगेय राघव ने हिंदीतर भाषी होते हुए भी हिंदी साहित्य के विभिन्न धरातलों पर युगीन सत्य से उपजा महत्त्वपूर्ण साहित्य उपलब्ध कराया। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर जीवनीपरक उपन्यासों का ढेर लगा दिया। कहानी के पारंपरिक ढाँचे में बदलाव लाते हुए नवीन कथा प्रयोगों द्वारा उसे मौलिक कलेवर में विस्तृत आयाम दिया। रिपोर्ताज लेखन, जीवनचरितात्मक उपन्यास और महायात्रा गाथा की परंपरा डाली। विशिष्ट कथाकार के रूप में उनकी सृजनात्मक संपन्नता प्रेमचंदोत्तर रचनाकारों के लिए बड़ी चुनौती बनी।


Rangeya Raghava, birth name Tirumalai Nambakam Vir Raghava Acharya, was born in Agra, a city of Uttar Pradesh state, India. A prominent Hindi writer of the 20th century, he completed his post-graduation studies from St. John's College, Agra, and later completed his Ph.D. on Guru Gorakhnath and his times. He started writing at the age of 13 years, and during his short life of 39 years, he was endowed with a number of prizes.

https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%...

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Profile Image for Ved Prakash.
189 reviews28 followers
November 29, 2017
गाँव की राजनीती पर लिखा गया एक बेहतरीन नॉवेल। 1962 में ये नॉवेल पब्लिश हुआ था लेकिन आश्चर्य की बात ये कि सारी चीज़ें अभी के परिप्रेक्ष्य में भी एकदम सटीक बैठती है। लगेगा कि वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखकर नॉवेल लिखा गया है।

पढ़कर अभी के समाज से compare करेंगे तो लगेगा कि दुनिया टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ा है लेकिन ह्यूमन रिलेशन और सामाजिक वैल्यूज की बात हो तो थोड़ा भी change नहीं हुआ।

गाँव के सरपंच और पंच के स्कूल गोइंग लड़कों का एक ही लड़की, जो की गरीब वर्ग से है
और शादीशुदा है लेकिन गौना नहीं हुआ है, से carnal रिलेशन है। इसी को छुपाने के चक्कर में दोनों उसकी एक सहेल का भी रेप करने का बाद मर्डर कर देते हैं।

कहानी का प्लाट है - ताकतवर सरपंच और पंच का अपने बेटे को बचाने के लिए दरोगा से लेकर जज तक को खरीदना और मृत लड़की के गरीब पिता और characterless सहेली को सरपंच के विरोधी गुट के द्वारा मोहरा की तरह यूज़ करना। सरपंच अपने बेटे से उसकी करतूत की वजह से घृणा कर उसे अपना बेटा तक नहीं मानता लेकिन अपनी पारिवारिक मर्यादा के लिए उसे बचाने की कोशिश में लगा है जबकि पंच पूर्ण रूप से पुत्रमोह में जकड़ व्यक्ति है।

कहानी में ढेर सारे पात्र हैं और उनके थ्रू अलग अलग व्यक्तित्व और विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न नेचर वाले लोगों के रिएक्शन को बहुत अच्छे ढंग से कैप्चर किया गया है।
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