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मैला आँचल
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मैला आँचल

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मैला आँचल हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उतर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं भी घनिष्ट रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है।

मैला आँचल का कथानायक एक युवा डॉक्टर है जो अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद एक पिछड़े गाँव को अपने कार्य-क्षेत्र के रूप में चु
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Hardcover, 353 pages
Published 2008 by Rajkamal Prakashan (first published 1954)
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Bhavika
Oct 22, 2015 rated it it was amazing
बिहार के पूर्णिया-कटिहार जिले के गाँव मेरीगंज की ये कहानी आज़ादी की और कदम बढ़ाते भारत की तस्वीर है जो भारत के ग्राम्य जीवन के अनेकों सत्यों से साक्षात्कार कराती है. एक तरफ जातिवाद का विषवृक्ष है जिसका पोषण उसकी दूर तक फैली गहरी जड़ें ही नहीं बल्कि समाज के इन खोखले नियमों के प्रति ग्रामवासियों की अगाध निष्ठा भी करती है. दूसरी और है, भूखी-नंगी, मलेरिया-कालाआजार से पीड़ित, हर संघर्ष में देवों की दुहायी देती, "पशु से भी सीधी और पशु से भी खूंखार" जनता जिसकी बड़ी कमजोरी उसका पेट है. इस जनता में राजनै ...more
Praveen Kumar
Aug 28, 2016 rated it it was amazing  ·  review of another edition
Shelves: hindi
तीसरी बार यह किताब पढ़ी। इस बार खुद के लेखन को सँवारने की चेष्टा से। हर वाक्य पर गौर कर रहा था। रूक कर दुबारा पढ़ रहा था। विदापत नाच के छंदों को जोर-जोर से पढ़ रहा था। फुटनोट्स भी पढ़ रहा था। रेणु की कथाएँ न शुरू होती है, न खत्म। बस चलती रहती है। जैसे आपकी जिंदगी। बिल्कुल ही uncoventional लिखते हैं। कोई नियम-कानून follow नहीं करते। अपभ्रंस भाषा अपनी मर्जी से तोड़ी-मरोड़ी हुई, पर ऐसा भी नहीं की चालू लेखकों की तरह बोल-चाल या chat की भाषा में लिख डाली हो। भाषा उस हिसाब से बदलती है, जैसे बोलने वाला। ...more
Anurag
Nov 24, 2015 rated it it was amazing  ·  review of another edition
‘फणीश्वरनाथ रेणु’ कृत ‘मैला आँचल’ को गोदान के बाद हिंदी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास माना जाता है । इस उपन्यास के द्वारा ‘रेणु’ जी ने पूरे भारत के ग्रामीण जीवन का चित्रण करने की कोशिश की है । स्वयं रेणु जी के शब्दों में :-
इसमें फूल भी हैं शूल भी है, गुलाब भी है, कीचड़ भी है, चन्दन भी सुन्दरता भी है, कुरूपता भी- मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया।
कथा की सारी अच्छाइयों और बुराइयों के साथ साहित्य की दहलीज पर आ खड़ा हुआ हूँ; पता नहीं अच्छा किया या बुरा। जो भी हो, अपनी निष्ठा में कमी महसूस नहीं
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Abhay Pandey
Jan 11, 2020 rated it it was amazing  ·  review of another edition
लेखन की जिस विधा के बीज प्रेमचंद ने बोए थे, उसको फणीश्वर नाथ "रेणु" जी बखूबी सींचते हैं। रेणू जी अपनी इस रचना के माध्यम से पश्चात् सभ्यता का लबादा ओढ़ चुकने की अग्रसर समाज को भारत की आत्मा से रूबरू कराते हैं। साथ ही सुराज ( स्वराज ) के आशावादी स्वप्न में डूबे समाज पर यथार्थ का तमाचा बड़ी ही बेबाकी से मारते है।
इस किताब की भाषा आंचलिक है, जिसमें आपको को एक अलग तरह के मिठास की अनुभूति होगी। वही दूसरी तरफ "डा-डिग्गा डा-डिग्गा ! रिं-रिं-ता धिन-ता !" जैसी ध्वनियाँ भी इस किताब को संगीतमय बनाती है। 'भार
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Sheetal Maurya - Godse (Halo of Books)
This book travels from the era of pre independence to post independence. The author has tried to show various social, political aspects through various characters. This book give a great message but it has end number of grammatical mistakes which I think should not be there as it is the 39th edition. Overall a good read !
Aishwarya Mohan Gahrana
Apr 16, 2016 rated it it was amazing
प्रकाशन के साठ वर्ष बाद पहली बार किसी क्षेत्रीय उपन्यास को पढ़कर आज की वास्तविकता से पूरी तरह जोड़ पाना पता नहीं मेरा सौभाग्य है या दुर्भाग्य| कुछेक मामूली अंतर हैं, “जमींदारी प्रथा” नहीं है मगर जमींदार और जमींदारी मौजूद है| कपड़े का राशन नहीं है मगर बहुसंख्य जनता के लिए क़िल्लत बनी हुई है| जिस काली टोपी और आधुनिक कांग्रेस के बीज इस उपन्यास में है वो आज अपने अपने चरम पर हैं, और सत्ता के गलियारे में बार बारी बारी से ऊल रहे हैं| साम्राज्यवादी, सामंतवादी और पूंजीवादी बाजार के निशाने पर ग्रामीण समाज ...more
Siddhartha
May 18, 2012 rated it it was amazing  ·  review of another edition
This book is a masterpiece describing the rural and semirural life of Bihar (an Indian state) during the time of Indian Independence struggle. Writing in the local colloquial hindi, Renu beautifully potrays the real picture of effects of Gandhism, communism, religious fundamenatalism and congress party politics on the tumultous life of the villagers. I thoroughly enjoyed reading the book.
Aayush Raj
Nov 09, 2019 rated it it was amazing
"मां शकुन्तला, सावित्री आदि की कथा पढ़ने में मन लगता है, लेकिन उपन्यास पढ़ते समय ऐसा लगता है कि यह देवी-देवता, ऋषि-मुनि की कहानी नहीं, जैसे यह हम लोगों के गांव-घर की बात हो।"
📙
"मौजूदा सामाजिक न्याय विधान ने इन्हें अपने सैंकड़ों बाजुओं में ऐसा लाचार कर रखा है कि ये चूं तक नहीं कर सकते।... फिर भी ये जीना चाहते हैं। वह इन्हें बचाना चाहता है। क्या होगा?"
📚

इस साहित्यिक कार्य में गज़ब का फूहड़पन और मंत्रमुग्ध करने वाली शालीनता का समावेश है। मेरीगंज में स्थित इस उपन्यास कि कहानी कुछ अजब शुरू होती है और अ
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Ved Prakash
Oct 15, 2017 rated it it was amazing
यह रचना हिन्दी साहित्य का एक "पवित्र धर्मग्रन्थ" है तो फिर मुझ सा मूढ़ और नया पाठक इसके बारे में क्या लिख सकता है !!
लेखक ने खुद ही कहा है कि इसमें फूल भी हैं शूल भी, गुलाब भी, कीचड़ भी है, चंदन भी, सुंदरता भी है, कुरूपता भी। और हम इसमें गाँव की राजनीती, गरीबी, love, lust, incest, धोखा... सब कुछ पाते हैं।

गुलाम भारत के मिथलांचल के गाँव की कहानी है। कहानी का समय देश का आज़ादी की ओर अग्रसर होने का समय है। और गाँव की कहानी तो पुरे विश्व में एक सी है। बस समय का अंतर होता है। 1947 के भारत के गाँव की
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Anuj More
Sep 07, 2016 rated it it was amazing  ·  review of another edition
The book explores the life of a village in North Bihar, India. The situations, living conditions, thoughts, society are as relevant today as in times when the book was written.

The folk songs in between adds flavor in the happenings of the village. After a few pages, I started feeling that I am an insider and experiencing the events first hand.

A must-read to know about the social and political life of Bihar.
Ravi Prakash
Dec 15, 2017 rated it it was amazing
पंचलाइट और तीसरी कसम अर्थात मारे गए गुलफाम पढ़ने के बाद रेणू जी को और पढ़ने की चाहत बलवती होती गयी। यह उपन्यास रेणू जी द्वारा लिखा गया मास्टरपीस है। पढ़ने के बाद कोई भी बिना अभिभूत हुए नही रह सकता।
Dhiraj Nirbhay
Jul 05, 2015 rated it it was amazing  ·  review of another edition
so nice , i read it 4 times... Manihari Katihar Purniya .... A real story of village.. #Renu was too nicely use their pen nd create an amazing story.... #GramyAnchalkKathakar #Renu
Niket Kedia
Feb 19, 2017 rated it it was amazing
The best hindi book I read in recent times.

रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें गरीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, बाह्याडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है।
Nikunj Bharti
Aug 07, 2017 rated it it was amazing
The books language is its style-its story telling. Speaking language. It is full of slangs used by people of Mithila area of Bihar.
Apart from it, entire life of human being is captured in it. A complete book. A Hindi Classic.
Nilambuj Saroj
May 23, 2020 rated it it was amazing
हिंदी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में से एक
Anjali Mishra
Oct 12, 2017 rated it it was amazing
When innocence, tears, smile, emotions, pain, love and sweet aroma of a remote village of India comes with a book that is called मैला आँचल.
Akshar Gupta
Oct 13, 2015 rated it it was amazing
इस उपन्यास में नेपाल की तराई में बसे एक बिहार के गांव के निवासियों और जीवन का मार्मिक दृश्य रचाया है रेणु जी ने। उनके गद्य में एक संगीतात्मकता है जो उस प्रदेश की विभिन्न बोलियों के मिश्रण से और भी मधुर हो जाती है। "भारत आज़ाद", "बापू मरलै", घोर भ्रष्टाचार और निरंतर घटती अन्तर जातीय हिंसा इस आँचल को मैला और प्रत्यक्ष रूप से अराजक बनाती है। परंतु मुख्य किरदार डागडर साहब का परिप्रेक्ष्य आज के आधुनिक पाठक के लिए गांव मेरीगंज की जटिल पहेली को सुलझाने का काम करता है।

गांव के आदिवासी निवासी संथालों की स
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Suyash Mishra
Dec 04, 2018 rated it it was amazing  ·  review of another edition
तीन आने लबनी ताड़ी, रोक साला मोटरगाड़ी

मैला आँचल उपन्यास नही है। यह एक पूरी सभ्यता का आख्यान है। इसमें जीवन भी है, मृत्यु भी है, पुण्य भी है, पाप भी है, प्रेम भी है, घृणा भी है। इसके एक -एक वाक्य में भारतवासियों की धमनियों का रक्त हिलोरें लेता है। प्रत्येक घटनाक्रम में एक सत्य समाहित है जिसे न जाने कितनी बार घटित होने के बावजूद कभी दर्ज नही किया गया। मैला आँचल उन बेजुबानों की आवाज है जिसे कभी सुना नही गया था। उन निर्दोषों के जख्मों पर मलहम है जो गरीबी, अशिक्षा और असमानता की व्यवस्था में जन्म लेने
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Ashish Tyagi
Jan 20, 2019 rated it really liked it
भारतवर्ष का ऐसा कौन सा अवसाद है जो इस उपन्यास में नहीं है |
इसमें जातिवाद है इसमें जमींदारी का दंश है गरीबी अमीरी की दो फाड़ है |
आज़ादी की और बढ़ते भारत के एक ऐसे इलाके की कहानी जो शायद नक्शे में ढूंढ़ना भी मुश्किल हो |
कैसे खुशहाली की तरफ बढ़ते देश का एक गाँव अंधकार की और धिका जा रहा है | उसी की कहानी है "मैला आँचल" |
पढ़ते हुए कई बार रुकने को मन करता है की पता नहीं अगले पेज पर क्या हो जाए | कहीं कहीं किसी पात्र पर ऐसी बितती है की गला भर आता है |
बावनदास कहीं कहीं आता है लेकिन जब से उपन्यास खत्
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Navneet Pandey
Nov 11, 2018 rated it it was amazing
अद्भुत आंचलिक उपन्यास। महज कथानक के बारे में कहें तो ऐसा लगता है पूरी पूर्णिया का तत्कालीन घटनाक्रम हमारी आंखों के सामने ही हो रहा है।तत्कालीन राजनीतिक विमर्श आज की राजनीती की एक कड़ी जोड़ देते हैं।
कल्पना जैसा तो कुछ लगता ही नही,सारे पात्र जीवंत हैं।ऐसा लगता है कोई सरकारी दस्तावेज है जो पूर्णिया जिले से और उसके लोगों से पूरी दुनिया का साक्षात्कार करा रहा है।
रेणु जी के लेखन पर टिप्पणी करने का साहस तो एक पाठक की तरह नही है फिर भी ये उपन्यास लेखन के स्तर पर विशिष्ठ है।
सभी भाषा के साहित्य प्रेमियों
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Garett Hotte
May 24, 2016 rated it it was amazing  ·  review of another edition
Shelves: india
This book gives us a peak into the politics and cultural changes of India throughout its independence from Britain, from the perspective of a small village near the Pakistan border. We see defenders of traditionalism and the oppressive caste system clash with modernists and socialists, seeking to change India for the benefit of all. We also see how each of these groups are taken over by opportunists who spout party lines but are only concerned with increasing their own wealth and power.
अभिषेक
Feb 27, 2019 rated it it was amazing  ·  review of another edition
Shelves: favorites
फणीश्वरनाथ 'रेणु' चाटुकारिता से ऊपर उठकर, किसी पार्टी का, आन्दोलन का, भावना का ना होते हुए इस उपन्यास में देश के हुए हैं, लोगों के हुए हैं, यथार्थ के हुए हैं.
आजादी के अहम् का बुलबुला फोड़ता, यह पुस्तक नहीं आईना है, आदमी का आदमी के लिए.
Bharat Jogadia
Apr 05, 2016 rated it it was amazing
This is very good book explaining the social-political life of India. This does not apply only to rural India, but urban too. Phanishwar ji explains inception of democracy India, the power that came with it and how powerhungryness is destroyed it.
Mukesh Kumar singh
Jan 04, 2016 rated it it was amazing
A very real and vivid portrayal of rustic Bihar. Read the whole reading out loud.
Amit Srivastava
Feb 02, 2016 rated it it was amazing
Shelves: hindi
आंचलिक साहित्य की प्रतिनिधि रचना। उत्तर भारत के गाँव का इससे सटीक वर्णन किसी भी अन्य रचना में नहीं।
Ardhendu Mishra
its maila aanchal..... how bad sometimes translations are....sic...
Saurabh Singh
this is amazing
Rajesh Bhandari
Oct 13, 2017 rated it it was amazing
Story telling at it's best.
Shubham Gupta
Oct 02, 2016 rated it liked it
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Deepak Pathak
Jan 17, 2014 rated it really liked it
A definite masterpiece.
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