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पुतली

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धूसर पहाड़ियों से घिरी उस घाटी में यह सामान्य सर्दियों की ही एक रात थी, जिसमें सफेद बर्फ की पतली चादरें हर तरफ देखी जा सकती थीं। आसमान नारंगी रंग के संकेत के साथ सामान्य धूसर था, क्योंकि सूरज जंगलों में विचरण करने वाले विभिन्न जानवरों को छाया देने वाले चीड़ के पेड़ों से ढकी पहाड़ियों की ओट में बस ढलने ही वाला था। मगर सबसे चौंकाने वाला नजारा उस बड़ी नीली झील का था

85 pages, Kindle Edition

Published November 16, 2021

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Anuj Tikku

101 books7 followers

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Displaying 1 - 6 of 6 reviews
9 reviews
February 6, 2022
हर किताब अपने तरीके से अनमोल और अतरंगी मानी जाती है।
यह किताब लेखक ने सात अध्याय तक लिखी है।
जंगल में यह पुतली। यहां बहुत जयादा ठंड होती थी। इतनी ठंड की सर्दियों के मौसम में यहां झील पर पानी के उप्पर बर्फ की मोटी चादर जैसा हो जाता था.
यह पुस्तक में प्रोफेसर सुशांत के बारे में दिया गया है। यह इतनी ठंड में रहने के आदिन थे। वह अपना जीवन अकेले बिताते थे और थानकवाशियों बहुत सम्मान करते थे। सदा जीवन और ज्ञान से भरपूर थे। उनको जंवारो को करीब से निहारते थे।
उन्होंने अपने जीवन में वन्यो के बारे में बहुत किताबे लिखी है और सर्दियों में झील की तस्वीरे खीची है।
यह पुसतक पढ़ने के बाद, उसने संभावित होते है और इस कहानी के माधयम से जीवन की बहुत सारी चीज़े समाज आती है।
लेखक का लेख बहुत सरल तरीके के दिया गया है , और जिस तरीके से वर्णन किया गया है, वो तारीफ के काबिल है। मैं आशा करती हु की और ऐसे लेख हम इनसे पढ़े और सीखे।
कहानी का शीर्षक और कहानी, दोनो पूरी तरह से मेल खाती है। मुझे पसंद आया कहानी का अंत जो अलग सा दर्शाया गया है।
Profile Image for SCULPTOR Of EMOTIONS.
451 reviews5 followers
February 13, 2022
थ्रिल पे लिखित और निर्धारित किताबों में हमेशा ही मुझे रुचि नजर आती दिखी है। चंद शब्दों में जब कोई किताब एक घबराने के बराबर माहोल और ऐसी किताब जो पढ़ने वाले को एक अलग सी गहराई में ले जाए, उस किताब की बात ही क्या।
इस किताब में अगर सही रूप से एक सिखाए गए मार्ग के सहारे अगर लेखक ने कहानी का उल्लेखन किया होता, तो यह किताब और इसमें लिखित कहानी बेशक औरों को एक शानदार किताब लगती। मुझे किताब की बाहरी छवि जो की इसका कवर पेज है, एक तरह से बहुत आकर्षित करता नजर आया। कहानी साधारण तरह से शुरू होती है पर इसका अंत ही है वो, जो सबसे ज्यादा पसंद आया मुझे। कहानी में अगर बातों की खीचातानी कम होती, तो यह और सख्त, और रहस्यमय लगती और पढ़के बेहद ज्यादा आनंद आता पाठको को।
जिस तरह हर बात को ठोस रूप से लिखा गया है, वो पढ़ना और उस दौरान कहानी में जीना, एक खूबसूरत अंदाज है लेखन का।
3 reviews
February 18, 2022
इस किताब में लेखक से प्रोफेसर सुशांत के बारे में दी गई कहानी और जिनका जीवन आम लोगो के मुकाबले काफी साधारण और कठीन रहा है।
प्रोफेसर सुशांत एक वैज्ञानिक थे और जीवन में किसी भी चीज़ का भय नहीं रहा जब की उनकी जिंदगी जंगल में लकड़ियां काटने में और वहा के प्राणियों से सामना करने में जाता था।
उनको परसखियों पर कोई किस्म का विश्वास नहीं था पर जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है और जिस तरह किताब में लेखक ने कहानी का मोड़ बताया, जिसके कारण प्रोफेसर की सोच पूरी तरह बदल जाती है, वो वाकए में पढ़ने हेतु जानने लायक है। मुझे किताब कुछ ज्यादा पसंद आई क्युकी इसका आकर्षण एक अलग सा खीचाव महसूस कराती है। लेखक ने कार्य खूबसूरत किया और मेरी नजर में थोड़ा और खूबसूरत और खास बनाया जा सकता था।
9 reviews
February 10, 2022
कैसे नजर आए किसी को रास्ते जब छाया हो अंधेरा घना सा। कैसे नजर आए सच्चाई जब छाया हो पर्दा झूठ का। एक अलग सी कहानी है इस किताब में जो की अनुज जी द्वारा लिखित पुतली नाम के शीर्षक पे आधारित है। कहानी दिलचस्प ही नही, कहानी एक बेमिसाल रूप से हर पन्ने पे दर्शाई गई है। कहानी अपने कद में चोटी होने के बावजूद, एक अलग से वातावरण को बनाए रखती है जिसमे पाठक अंत तक किताब से जुड़ा रहता है।

लेखक के किए गए परिश्रम से काफी संतुष्ट हुई हूं में और जिस तरह से खौफ सा माहौल है बना इस कहानी में, मुझे अत्यंत पसंद आई। हर कहानी अपने ही अंदाज में अलग सी होती है और यह एक पढ़ने लायक कहानी है शुरू से अंत तक।
2 reviews
February 18, 2022
भूत। मात्र एक छोटा सा यह शब्द बहुत सफल रहा है दुनिया भर के लोगो के मन में और रातों में खौफ और डर भरने में।
कहानी पढ़ने का मन तब बनने लगता है जब प्रोफेसर अचानक सवालों के समंदर में डूबने लगता है और सोच में पड़ता है की कैसे कोई इतने बदलाव सह सकता है। कहानी में एक भोले सांप का उल्लेखन किया है जो एक अलग सी कड़ी है इस किताब के कहानी और सीधी तरह शीर्षक से जुड़ी है। कहानी का शीर्षक अपने आप में एक अलग कहानी है जिससे जानने के लिए किताब को अवश्य चुनना होगा।
प्रोफेसर हमेशा तर्क, परिकल्पना और प्रमाण में विश्वास रखा करता था और अंध विश्वास से कुछ ज्यादा लगाव था।
Profile Image for Dr. Monidipa Dutta.
1,068 reviews17 followers
May 20, 2022
When I started reading this book, I liked the plot. The story started on a good note, definitely had potential but then grammatical error messed up the experience. Good editing is required for the book.
Displaying 1 - 6 of 6 reviews

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