कविता लिखना मेरे बस में भी नहीं है लेकिन कविता हो जाती है। कब किस बात पर कैसे हो जाती है यह तो मुझे भी पता नहीं। आप कहेंगे यह नाम ही अजीब है ऐसा तो कोई शब्द ही नहीं होता। जी नहीं होता। अधिकतर कविताएँ ट्विटर वाली कविताएँ हैं, छोटी- छोटी, चुटीली, कुछ गद्य की तरह लगने वाली रचनाएँ हैं जिन्हें मैं कविता तो नही कह सकता। कुछ कैक्टस सी कांटे वाली और कुछ कोमल फूल सी रचनाएँ भीं हैं। ट्वीट वाली कविताएँ ही ट्वीविताएँ हैं। उसके अलावा भी बहुत कुछ है लेकिन सब कुछ व्यंग्य है। अधिकतर राजनैतिक व्यंग्य। किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मंतव्य नहीं है अतः इसे केवल आनंद के लिए पढ़ें।
अजय चंदेल
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