हालातों का मसला और एक साधारण सी भोली भाली कहानी...
सुनो ना , हमारा मिलना तय था। तुम्हारी नियति खींच रही थी मुझे , और मेरी तकदीर को इंतज़ार था तुम्हारा। हम कैसे मिले इसका मलाल ना तुम्हें है ना मुझे , हम कब मिले इसके बारे में ना तुम सोचते हो ना मैं , पर जो हम सोचते है वो एक सा है बस हम बोलते नहीं । जो हम महसूस करते है वो भी एक सा है , अजीब सी पहेली है ना। हम कश्मकश में खींचते जा रहे है , कभी तुम्हारी सासें पुकारती है मुझे, कभी मेरी सासें खींची चली आती है तुम्हारे पास।
वो जो तुम सोचते थे की रिश्ते में रह कर भी इंसा अकेला होता है, आजकल तुम सोचते हो मेरे आने के बाद तुम अकेला महसूस नहीं कर पाते। तुम ये सोच को दूर करने को आतुर आजकल पहर दर पहर झुंझला से जाते हो , जो कभी हुआ नहीं वो कैसे हो रहा है ये बार बार दोहराते हो। फिर तुम मुझसे दूर भागना चाहते हो, पर उतना ही मेरे करीब खींचे चले आते हो। वो जो मैं सोचती थी कभी किसी को दर्द से रूबरू ना करवाउंगी , तुम्हारे आने के बाद ये मुए शब्द अब मुझ तक ठहर ही नहीं पाते। वो जो मैं सोचती थी किसी का हाथ कभी ना थामूंगी , तुम्हारे आने के बाद अब मेरी लकीरे तुम्हारी लकीरों से जुड़ संपूर्ण होना चाहती है शायद। और ये जो तड़प है , इसके जवाब ना मेरे पास है ना तुम्हारे। हमे सुकून मिलने लगा है , एक दूसरे में , हमे हक़ लगने लगा है , एक दूसरे पे। जाने कौन हो तुम , पर जो भी हो मुझे तुम्हें मेरा कहने को मन करता है और मेरे से ही लगते हो। मेरा अस्तित्व लगते हो।
वो जो तुम हक़ दिखाते हो बिन बोले , उसका मुझ पर नायाब सुरूर है। वो जो तुम भीड़ में मुझे देख लेते हो चुपके चुपके , मुझसे पूछो तुम्हारी उस अदा पर मुझे कितना गुरूर है .. वो जो मैं तुम्हारे लिए कुछ चीज़ें चुपके से कर जाती हूँ, मैं जानती हूँ तुम्हें पता है। वो जो तुम्हारी परवाह मैं बिन बोले कर जाती हूँ, मैं जानती हूँ तुम्हे सिर्फ उसी का नशा है। सब आस पास होते है पर तुम्हारे सिवा अब कोई दिखता नहीं , अब आईने में भी तुम दिखते हो , मेरा अक्स भी मुझे अकेले मिलता नही। तुमको लगता है मैं तुम्हारी हूँ पर तुम असमंजस में रहते हो , मुझे लगता है मैं बिन बोले तुम्हारी कैसे हो बैठी और आने बहाने ये सोचती रहती हूँ।
जानते हो तुम अस्तित्व हो मेरा, इसीलिए मैं दूर जाने को आतुर हूँ पर जा नहीं पाती तुमसे। और मैं परछाई हूँ तुम्हारी, तो लाख कोशिशों के बाद भी तुम जाओगे कहाँ दूर मुझसे? तुम्हें मुझे खोने का डर लगने लगा है, और मैं तुम्हें पाने की अनजाने मैं मन्नत मांगने लगी हूँ। अब तुम हर आवाज़ में मेरी आवाज़ खोजने लगे हो, अब लोगों में मुझे ढूंढने लगे हो, अब मेरे ख्यालों से घिरे मिलते हो, सुनो ना मेरे रंगों मैं सजे हुए कितने पूर्ण लगने लगे हो। तुम मानने लगे हो हमारा रिश्ता अलग है , तुम जानने लगे हो मैं ठहराव देने आयी हूँ तुम्हें , जो तुम किसी के साथ नहीं कर पाते वो बिना किये मेरे साथ कर बैठते हो, इस रिश्ते के मायने कितने गहरे है ये तुम मुझसे बेहतर समझ पाते हो। तो ये हज़ार रिश्ते मिल बिछड़ जाएंगे हमे पर तलाश हमें एक दूसरे की ही थी, मैं मोहब्बत बन रही हूँ तुम्हारी आस आजतक तुम्हें बस मेरी ही थी।
मैं क्या सोचती हूँ तुम्हारे बारे में इसकी कोई सीमा ही कहाँ है, तुम श्रृंगार हो मेरा इससे बेहतर कोई परिभाषा ही कहाँ है। अब पायल पहनती हूँ तो सोचती हूँ तुम्हें छनक सुनेगी? बिंदिया लगाऊं तो सोचती हूँ तुमको कैसी लगेगी? अकेले सजती संवरती हूँ फीकी सी लगती हूँ, तुम्हारी मेरी तस्वीरों को देखती हूँ तो पूरी सी लगती हूँ।इन ख्यालों सवालों का कोई अंत नहीं, पर तुम्हारा मेरा बंधन जन्मों का है इस पर कोई व्यंग नहीं। तो ना मैं भाग सकुंगी ना तुम छिप पाओगे। जो तकदीर लिख चुकी है उसे ना मैं छिपा सकुंगी ना तुम मिटा पाओगे। मान हम चुके है ज़बा से कहना बाकी है, जान हम चुके है पर मुझे तुम्हारी जान कहलाना बाकी है।
उससे पहले , सुनो। मैं दिल नहीं तोडूंगी तुम्हारा। मैं तुम्हें जोड़ने आयी हूँ। मैं विश्वास बनूँगी तुम्हारा। मैं तुम्हारा हर रिश्ता संजोने आयी हूँ। तुम्हारे हर तिलमिलाते सवाल का जवाब हूँ मैं और मेरी हर अड़चन की सुलझन हो तुम। सुनो ना, तुम्हारी तकदीर हूँ मैं, मेरी तकदीर हो तुम